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हर रोज एक नया गम दो
मुझे गमों  की आदत है
आज  ये पास नही..... ....  !
ये क्योकर मुझसे दुर है
बस पत्थर ही मारों दोस्तो
न ही मैं नूर हूं न  ही सरूर हू!
कही उठा कर एक कोने में रख दो दोस्तों
किसी की ग़ल्तियाँ और माफ़ी ?
 जमी मेरे किस काम की!
दूर फलक पर घर बना दो
मुझे एक चादर सिला दो
आओ गले लगा लू तुम्हें!
पल भर भी दुर न हो
क्या ढुढता है अब ये दिल
साया भी जुदा हो चुका है दोस्तों !
उसके सितम की कोई
हद तो होगी,अब तो सितमों
शह ढूढंता हू दोस्तों........!
              -----------

Comments

  1. उसके सितम की कोई
    हद तो होगी
    सुंदर शब्दों के साथ भावाभिव्यक्ति।

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  2. जमी मेरे किस काम की!
    दूर फलक पर घर बना दो
    मुझे एक चादर सिला दो
    आओ गले लगा लू तुम्हें!

    in panktiyon dil choo liya.......

    bahut hi behtareen kavita......

    ReplyDelete

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मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे, चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........! खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे देखों मै तुम्हारे करीब हूं फिर तुम मुझसे नाता क्यों तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........! एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं वरना तो सभी रूसवा हो चले है दिल को तो समझा ही लेना  वह कब तक तुम्हे रोकेगा  एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा...... फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा किसे अपना मानते, जानते हो कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब  को अब तक न समझ पाये ............... वही तो मुझे यहां ले आयी है उसका और मेरा तो बरसों पुराना साथ है ............ जहां खुशी जाती है मै छाया बन उसके पीछे -पीछे चलता हूं मै उसका साथ कभी नही छोडता  और तुम खुशी की तलाश में मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो  अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां  कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!!  

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