Thursday, July 4, 2013

गूंजते है सन्नाटो में ......!!

अब वो बात कहा, जो कभी थी 
गूंजते है सन्नाटो में 
कह्कशे जोरो से 
थी मुकमल कोशिस बस ....!!
गमगीन सी है महफ़िल तेरी 
वक्त कभी ठहरता नहीं 
इंतजार कितना भी करो 
जो आज है वो कल न होगा 
जो कल होगा उसका बारे 
क्या जान सका कोई कभी .....!!!
परदे लाख डाल लो 
सच  पंख पसारता ही है 
फिर टूटते है मासूम दिल 
लगती है तोहमते वफ़ा पर 
अब यहाँ क्या पायेगा 
लाशो और खंडरो में 
अतीत को क्या तलाश पायेगा 
रहा एक सदमा सही, पर 
हुआ यह भी अच्छा ही  
चल गया पता अपनों में गैरो का 
सभी अपने होते तो गैर  कहा जाते 
अब तन्हाई में ख़ुशी का दीप जलता नहीं 
बस है सिसकियाँ...और वीरानिया 
देखना है वफाएचिराग जलेगा कब तलक  
जो था गम अब उसकी भी परवाह नहीं..... l

Saturday, June 29, 2013

छलक पड़े.... तो प्रलय बन गए ......!!!

क्यों हो गयी शिव तुम्हारी जटाए
कमजोर नहीं संभल पाई ........!!!
वेग और प्रचण्डना को 
मेरी असहनीय क्रोध के आवेग को 
पुरे गर्जना से बह गया क्रोध मेरा 
बनकर मासूमो पर भी जलप्रलय 
मै............
सहती रही .निसब्द देखती रही 
रोकते रहे मेरी राहे अपनी ...
पूरी अडचनों से नहीं ,बस और नहीं 
टूट पड़ा मेरे सब्र का बांध और तोड़ 
दिए वह सारे बंधन जो अब तक 
रुके रहे आंसू के भर कर सरोवर 
छलक पड़े तो प्रलय बन गए ....
कब तक  मै रुकी रहती.. सहती रहती 
जो थी दो धाराये वह तीन हो चली है 
 एक मेरे सब्र की, असीम वेदना की...
उस अटूट विश्वास की जो तुम पर था 
खंड खंड है सपने, घरोंदे ,खेत, खलियान 
तुम्हारा  वो हर निर्माण जो तुमने ,
जो तुम्हारा नाम ले बनाये थे लोगो  ने 
गूंज रहा है मेरा नाम ......
कभी डर से तो कभी फ़रियाद से 
काश तुमने मेरा रास्ता न रोका होता 
काश तुम सुन पाते मरघट सी आवाज 
मेरी बीमार कर्राहे..........!!!!
नहीं तुम्हे मेरी फ़िक्र कहा 
तुम डूबे रहे सोमरस के स्वादन में 
मद में प्रलोभन में ,अहंकार में 
नहीं सुनी मेरी सिसकिया
रोती रही बेटिया..माँ लेकर तुम्हारा नाम 
...देखो प्रभु तुम्हारी दुनिया में 
क्या न हो रहा.. तुम मौन साधना में विलीन रहे  
कैसे न टूटता फिर मेरा वेग, कैसे रुकता मेरा प्रवाह 
रुदन से मेरे आंसू ...को नेत्र न संभाल पाए 
खुल गयी तुम्हारी जटाए भी .......
प्रलय को कौन रोक पता ..इसे तो आना ही था !!!


Friday, June 21, 2013

क्या नया निर्माण कर पायेगा ......?

भटकते रहे होकर गुमराह
खोजते रहे मंजिलो की निसा
पर्वत, जंगल,नदिया ,झरने
वर्षा ,हवा इन पर सबका हक़ है
नहीं वजूद इनके बिना
चाहते सभी हक जमाना
पर उड़ते बदल तुम्हे छु
कर उड़ जाएँगे ...कभी हाथ न आयेंगे
बनाता रह तू महल
अपने ख्याबो के ...
तेरे ख्वाबो का तमाशा
पल भर में खाक हो जायेगा
यह नियति है इसका भरोसा न कर
करना है भरोसा तो नेक नियति पर कर
तीर्थ तेरे मन में है तेरे घर में है
तू अपनी धूनी यहाँ न जमा
उलझा उलझा अपने बनाये जाल में
अब क्या करनी से बच पायेगा ...
विनाश को बुला कर
अब क्या बचा पायेगा
जब वक्त  था तब समझा ही नहीं
अब तो आदी,  झूठ और मक्कारी का
क्या नया निर्माण कर पायेगा,..................!!!

Saturday, June 15, 2013

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा .....!

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा
क्या कहा उसने
इतना तो बता दिया होता 
भुला तो दिया
दिल से जुदा कर दू
क्यों उसने क्या कर दिया 
भूले से ही सही 
कसूर तो बता देता
कर देता रुखसते मुहब्बत
अंधेरो  में जो चिराग 
जलाता रहा 
खुद ही शुरू करता है ....
कहानिया वो रोज नई
कैसे कहे  सितमगर से
 नहीं भुला सकते उसको
हर पल जो याद आता रहा 
लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा
मशगूल रहा वो गैरो में
अपनों पर जुल्म करता रहा
चीखती है दीवारे मुझ पर 
उसकी आवाज का जादू छाया रहा 
कब टूटेगा तिलस्म .........
मायाजाल जो बुनता रहा 
रहता है बेपरवाह सा
करते रहें दुआ फिर भी 
उसे मिले हर ख़ुशी 
चाहता वो जो रहा 
लम्हा लम्हा वक्त 
गुजरता रहा ...........!

Monday, June 3, 2013

प्यार की भाषा..........!

बताते है प्रेम, प्यार की परिभाषा लोग
बताते है सच्चा झूठा प्रेम ..................!
क्या है , यह अभी तक तो समझ न आया है
चाहत का दावा करने वाले धोखा ही देते है
अपना  काम निकालने के लिए
प्यार की भाषा अपनाते है.................
बना दिया है व्यापार हर रिश्ते को अब तो
रिश्तो में सोदागर का रेवेया नजर आता है
सच्चा प्यार न कुछ चाहता, न फरियाद करता है
अपने रहबर की ख़ुशी के लिए
अपनी जान निसार  करता है ......................!
मतलब का कारोबार
अब तो प्यार बनता जा रहा है
जो न पा सके किसी को
उसकी जान का गुनाहगार बन जाता है
डरते है प्यार के नाम से ही अब तो
जो कहे की प्यार है
वही दुश्मन नजर आता है...............!


(pic.frm google)






Thursday, May 16, 2013

Oh world Lovely world.....!


Oh world, Lovely world... 
You are so big......... 
Blue sky blue ocean
Green mountains.......! 
Your heart is so tiny 
white snow white pure water 
Oh world my imaginative world 
You are so far.......! 
I am little bird 
Wants to fly and fly 
you cut the wings 
Oh world,  cruel world 
why you so heartless 
when sleep dreams are mine 
but why are not......thy 
Oh world,  Lovely world 
Make me feel happy 
Enjoy me everything
Let me go where is my...world

Friday, March 1, 2013

ख्वाबो का सिलसिला जारी है......!

ख्वाबों सिलसिला जारी है
उसका आना जाना जारी है
दर्द देना दर्द लेना जारी है
आंसुओं से लिखता है 
इबारत इश्क की
बेगुनाह को गुनहगार 
ठहराना जारी है.........
डर-डर के जीता रहा
ताउम्र जिन्दगी
के जिन्दगी को मौत 
कहना जारी........... हैं 
नही जानता निभाना वफा
प्यार का तमाशा 
बनाना जारी......... है !


Sunday, February 24, 2013

यादे लहर है...............!

यादे लहर है...........!
शान्त मन में करती है हलचल
कभी कडवा जहर तो कभी मिठास 
बचना कितना मुश्किल
तिनका-तिनका जुडता दिल
पल में बिखेर देती है
यादों के फसाने कितने !
यादे लहर है........!
भिगों देती है दामन को
करती गमों से सरोबार
यादों के जंगल कही एक फूल
अपनी खुशबू देता ताजगी
फिर खंगालते पन्नों को 
जिसमें कुछ  न मिलता 
यादें लहर है...........!
खीचती है अपनी ओर
झील में फेका गया कंकर
फैलते सिमटते विलय
डूबता सूरज धुंधली शाम
यादें लहर है................।

Tuesday, February 19, 2013

कौन हो तुम...........?

सफर में चलते चलते 
टकरा गयी जिन्दगी 
उसने पूछा कौन हो तुम
मैने कहा ख्वाब,ढूंढ रही हूं मंजिल
वीरानों में सावन तलाशती हूं
घनघोर घटा में 
गरजती बिजलियों से डरती 
नीड तलाशती हूं
दूर तक जायेगा यह सफर 
या यही बदल देगा रास्ता
अनजान हूं अभी राहों से 
जिन्दगी खामोश रही
सहम गयी मेरे सवालों से
कौन यह , जो मुझे मांग रही है
क्या जिन्दगी हमेशा साथ देती है.................!

Monday, February 18, 2013

जब प्यार होगा...............

कभी तो अहसास होगा
है यह प्यार कुछ और न होगा
बहाने लाख बनाये
छिपा ले दिल को कोने में
जब यह सांस लेगा
अपने वजूद को जतला ही देगा
शब्दों से बयां होगा
आंखों का जादू होगा
जब प्यार होगा तो
खुद ही इजहार होगा.......................!



भूल न जाना..........................!

धरती जब तक रहेगी 
अंबर जब तक रहेगा 
तुम से प्यार करूगा..........
यह भूल न जाना
अपना है इस जहां में
रहता है बेकरार
बहती यह मन्द पवन
क्या कहती है सुनो
नजारा सारे बेमानी 
जो तुम न हो तो 
क्या है यह जिन्दगानी
वादा कर भूल न जाना
धडकनों को कहो 
थोडा ठहर बंसत
है जो आने वाला है
उस पर अपनी बहार लूटा
गर भूल गया वो तूझे 
तो क्या थोडा एतबार तो कर
क्या कहता भंवरा फूल से 
फूल फूल पर मंडराना
अब तो संभल, खामोश
है वफा कुछ तो भरोसा कर
गर किया वादा तो उसको निभाना ।



Monday, February 4, 2013

आस का सूरज बनना तुम........!

जब भी थक कर सोने लगु मै
आकर हौल से जगा देना तुम
रिश्तों का भंवर है जिन्दगी
उलझनों को  सुलझाना तुम
कटता है वक्त प्यार के सहारे
इस प्यार को जुदा न करना तुम
तमन्नाओ का समन्दर
कही लहरों से न टकराना
रिश्तो ने ही द्धन्द्ध मचाया है
देखो यह रिश्तें टूटे ....... न
जब भी छाये मायूसियों के बादल
आस का सूरज बनना तुम
मेरे ख्याल मेरे अपने ही सही 
थोडी जगह तो बना लेना
न मिल सको गर इस जन्म
अगले जन्म का इन्तजार 
करने का हौसला करना तुम
जब भी सपने आये 
उनसे कहना मेरा ही दीदार हो
गरजे मेघ और हो बरसा
जान लेना याद आये तुम
जब सोने लगु ,हौले से जगा देना तुम................!


Friday, February 1, 2013

उसकी बाते ..........

उसकी बाते बहार की बाते
बहारों से कहो,
रूको अभी.............।
वह है मुकम्मल एक
दास्तां,
थोडी अधूरी है
मुलाकात अभी
जो समझा ही
नही अभी तक
वह प्यार को क्या समझेगा
उसकी बाते रूकी-रूकी
रहने दो ख्याल को
रोको नही.............।
बहुत कम है
जिन्दगी बाकी
जीने के लिए
हर पल को बरस बनने दो।
उसकी बाते
बहार की बाते
बहारों से कहो
रूको अभी ...............।

Sunday, January 27, 2013

शब्द बन जायेगे नश्तर........

यह न सोचा था 
शब्द बन जायेगे नश्तर 
कर देगे भीतर तक छलनी..
      होगा उसका प्यार ही 
पर मेरे लिए अभिशाप से कम नही 
यह न सोचा था 
रूला कर उसको ,हम भी
हद से ज्यादा रोयेगे
    होगा यह अन्दाजे जुदा उसका 
पर मेरे लिए  कभी मान्य नही 
यह न सोचा था
तडपा कर तडपते रहेगे
   होगा एक नया अफसाना यही
पर मेरे लिए गमों की सौगात सही
यह न सोचा था 
यादों का सफर 
बन जायेगा बेर्दद सफर 
   होगा वह मुझसे जुदा सही 
पर मेरे लिए विराम नही.......... 

Saturday, January 26, 2013

जिन्दगी.........

एक सवाल मन में 
आता है कभी-कभी
जिन्दगी इतनी 
दूर क्यों भागती है
जब कोशिश करू
छिटक देती है दामन
बिखर जाते है
हर ख्वाब मेरे
जो बस रह गये बाकी
जीने की हजार 
वजहे पर सामने
 आ जाती है.........
एक तूझे ही प्यार
क्यों है मुझसे
दो चार पल
होते है खुशी के मयस्सर
रच देती है 
अपना चक्रव्यूह
बेबस सी निगाहे
ताकती रह जाती है............
रह जाते है बस सवाल दर सवाल...........!

Monday, January 21, 2013

अन्धेरा.......

अन्धेरा धीरे धीरे पंख
पैसारने लगे 
दिन भी 
गुमसुम खोने लगे
आती है दूर से 
कही एक आवाज
ठहरो अभी तो 
शुरूवात हुई 
फिर उजालों को
कह कर तो देखो
मै कही दूर न था 
छिपा था तुम्हारें 
आस-पास
तुमने कभी जाना
ही नही पहचाना ही नही
रात है तो सहर भी है
अन्धेरा अपना 
असर तो दिखायेगा 
न डरना इससे
कोई किरन ही 
ढूंढ लेना जो 
मंजिल तक पहुंचाये
वो सडक ढूंढ लेना------------------!


Tuesday, January 15, 2013

कुछ तो है उसके मेरे दरमियां...........

कुछ तो है
उसके मेरे दरमियां
फासला ही सही
पुकारता है
 मुझे ही 
जब जरूरत पडी
कुछ तो  है जो दिल
धडकता है सांसे रूकती है
कहने को
डर ही सही
जब खत्म हो
सबकुछ
कुछ तो रह जाता
बाकी है
आदत जो छुटती 
नही, याद जो जाती नही।
कुछ तो है उसके मेरे दरमियां
फासला ही सही..........!

Friday, January 11, 2013

बाते करती हो चांद तारों की..........!

बाते करती हो
चांद -तारों
किस्सों की,
 कहानियों की
परीलोक की बातें 
परीलोक में ही हो तो 
अच्छा है।
चांद का आना 
जमीं पर तारों 
का खिलखिलाना 
सितारों की बाते
सितारों से हो तो
अच्छा है। 
जमीं पर 
इन्सानों का 
अरे नही 
अब तो वह
भी बदलता 
जा रहा है ।
बाते करती हो
इन्सानों की ,
इन्सानों की 
बाते इन्सानों से
 करो धरती पर
इन्सानों का तो 
पता नही भूल
जाओ पुराने 
जमाने को
अच्छा है। 

Tuesday, January 8, 2013

था उसे भी इन्तजार.......!








था उसे भी इन्तजार 
क्या सोच हाथ 
बढाया होगा
सन्नाटे से कहो
चीख कर शोर न करे
खामोश रह कर 
हक अदा करे.........!
कहां जा कर 
खत्म होगा यह 
अनजान सफर
जो शुरू तो हुआ 
पर खत्म होने 
नाम नही लेगा..........!
था उसे भी गुमां 
अपने वजूद 
पर इतराया तो होगा
क्षण भर में
चोटिल हुए 
सपने .............!
ख्वाबों को हकीकत
से बावस्ता
तो होना होगा.........!



Thursday, January 3, 2013

बेचैन मन ......


घना कोहरा 
बेचैन मन 
जाने किसकी 
तलाश में 
फिर रहा दर ब दर
दिशा या दिशा भ्रम 
कहां ले जायेगा
यह पागलपन
सब तरफ ढूंढा
फिर भी 
सकूंन कहां
उदासी का आलम
अब मेरा इम्तहां
भी क्या लेगा 
मै इस उम्मीद पर 
डूबा कि बचा लेगा
दामन ओढ फरेब
का मेरा ही 
रहबर निकला
जिसकी थी तलाश
उसे ही नदारद पाया ।
वह खो जायेगा 
गुमनामियों में
फिर कौन 
उसका अलख जगायेगा।

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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