Tuesday, February 19, 2013

कौन हो तुम...........?

सफर में चलते चलते 
टकरा गयी जिन्दगी 
उसने पूछा कौन हो तुम
मैने कहा ख्वाब,ढूंढ रही हूं मंजिल
वीरानों में सावन तलाशती हूं
घनघोर घटा में 
गरजती बिजलियों से डरती 
नीड तलाशती हूं
दूर तक जायेगा यह सफर 
या यही बदल देगा रास्ता
अनजान हूं अभी राहों से 
जिन्दगी खामोश रही
सहम गयी मेरे सवालों से
कौन यह , जो मुझे मांग रही है
क्या जिन्दगी हमेशा साथ देती है.................!

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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