Friday, March 1, 2013

ख्वाबो का सिलसिला जारी है......!

ख्वाबों सिलसिला जारी है
उसका आना जाना जारी है
दर्द देना दर्द लेना जारी है
आंसुओं से लिखता है 
इबारत इश्क की
बेगुनाह को गुनहगार 
ठहराना जारी है.........
डर-डर के जीता रहा
ताउम्र जिन्दगी
के जिन्दगी को मौत 
कहना जारी........... हैं 
नही जानता निभाना वफा
प्यार का तमाशा 
बनाना जारी......... है !


कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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