Sunday, October 4, 2009

एक ख्याल हुं मै ।

कोई मुझसे कहे कौन हुं मै, एक ख्याल हुं बस
ख्यालो का काई नाम नही़, नही कोई रंग रूप
के बस ख्याल हूं मै
कभी आना कभी जाना, है फितरत इसकी
ख्याल का कोई नाम नही, नही रंग रूप 
के बस एक ख्याल हुं मै
कोई मुझसे कहे तेरी चाहत क्या है
बस दफन होना 
न पूछे कोई मेरा हाल क्या है
के बस ख्याल हूं मै
झूठ फरेब की इस दूनिया मै कोई
हिमाकत करू ऎसी नही औकात मेरी
कोई मुझसे पुछे कहां है घर मेरा 
वो बसेरा ठुकरा दिया हमने
के बस ख्याल हूं मै।
ख्यालों का कोई पडाव नही
टुटना बिखरना जन्म उनका

फिर क्यू शिकायत 
ख्याल का कोई नाम नही , नही रंग रूप
के बस एक ख्याल हूं मै
जाने अन्जाने ही आ जाऊ दिल में तो
अफसोस न करना 
इतनी जल्दी मिट न पायेगी हस्ती मेरी
रह रह कर कचोटना
है आदत मेरी
के बस एक  ख्याल हुं मै
बन्द कर लो अपनी आंखे
हाजिर मुझे पाओगे
तुम कहो और मै चला जाऊ
तुम्हारे जहन के सिवा कहां है
बसेरा मेरा, कह दो चला जाउगा
गल्ती से फिर आ जाऊ तो मुझे कुछ न कहना
के बस एक ख्याल हुं मै।

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बेझिझक सी तरन्नुम में यह दौर कैसा है....


बेझिझक सी तरन्नुम में ये दौर कैसा है
क्या सोचे हम क्या कहे अब सब कुछ फीका है।
मायुस होता है मन है बेचैन भी
देख खाली हाथों को कितने व्याकुल है हम
बेबसी को क्या दूसरा नाम दूं
जो नही अपना उसे कैसे अपना कहु
क्या सोचे क्या कहे हम अब सब कुछ फीका है ।
आरजू क्या चाहती है देख ये पागलपन
न कहो उसको कुछ भी वो एक भंवरा है
उसकी आंखो की चमक को क्या नाम दे हम

लुटाने बैठा है जो अपनी हस्ती आज
रोक लो उसको बर्बादियों के कहर से
क्या सोचे क्या कहे हम अब सबकुछ फीका है।



































कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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