Tuesday, December 27, 2011

आने वाला पल क्या खेल रचायेगा.......!

हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा
तूझे समझने की कशिश में यह वक्त गुजर जायेगा
कभी लगता अपना कभी फरेब सा 

धोखा सा कभी तो कभी अनजाना सा साया। 
हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा
कभी अपनो का साथ तो कभी जुदाई
हर पल जीने की तमन्ना तो उचाट मन 

जीवन को  जानने की राह में हरदम
कुछ नया ही रहस्य उभर आया 
चौकन्ना तो कभी लापरवाह सा 
क्यों यह  साथ इतना खामोश सा रहा

हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा ।
अब आने वाला पल क्या खेल रचायेगा
कौन हंसेगा किसको रूलायेगा 


आने वाले वक्त को क्या समझ पायेगा ।

Sunday, December 25, 2011

Merry Chirstmas

wish u a Merry Chirstmas 
           wish u a Merry Chirstmas
                        &
wish u a happy new year
wish u all the things u need in your life
wish u all the blessings ,that u always wanted.

Monday, December 5, 2011

जहां होते हो ख्वाब सच........!

जहां होते हो ख्वाव सच
एक ऎसी दूनिया कहां पाआगे 
हर चेहरा हो मुस्कुराता 
नही गम सिर्फ खुशियों का समुन्दर 
इस जहां में तो मुमकिन नही 
करे उम्मीद या मागें दुआ
ऎसी ख्वाहिशें सिर्फ ख्वाहिशे ही होती है ।
 क्या सोच यह जहां बनाया गया होगा
क्या उसे अपनी इबादत पर 
नही रहा भरोसा
इस विश्वास की परीक्षा लेता 
रहा हर बार...हर बार....!
करते है अलविदा जाने कहां
हो जाते है गुमशुदा तलाशों
कितना भी वो नही मिलते 
जो लगते है सबसे अच्छे।
हम रोते है हंसते है 
फिर नाचते है जैसे नचाना चाहे वो
पर नही उसे अपनी दूनिया को
थोडा तो बदलना होगा कब तक
कहेगे बस अब नही देगे इम्तहां.........................! 

Monday, September 19, 2011

जीवन धारा: जो नही है साथ...................!

जीवन में कितने ही उतार चढाव आते है पर जीवन कभी नही रूकता अगर कभी तुम थकने लगो कुछ नये रंग भरो रोज के थकाने वाले ढर्रे को छोड हमेशा नया करत...
पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे ....जीवनधारा
http://chittachurcha.blogspot.com

Saturday, July 16, 2011

वही लडखडाया क्यूं है?

साथ चलने का वादा!
वादा तो फिर वादा है
जरूरी तो नही इसको निभाना!
जो कहता  रहा शख्श
सभंलना,संभलना वही फिर,
लडखडाया क्यूं है ?
कौन समझे दिल की बातें !
यह तो बाजारों में बिकता है
सौदेबाजी है प्यार, वफा
सच्चाई गुजरे जमाने की अदा है।
सच से मुंह न मोडो
झूठे जाल फैलाये कितने रहबर है।
जिसको समझते  हो तुम जिन्दगी
वही तो मौत का सामान है!
दावा करते है जो उम्र भर 
साथ निभाने का !
यह साथ बीच सफर में छूटता क्यूं है !
भ्रम में खो अपनों से गुस्ताखियां
ये तो खुदा को भी मंजूर नही है!
पलट देता है वह पल में किस्मतें
अपनी किस्मत पर रक्श करते जो है ।
पक्षी तू अकेला राह में 
किसको अपना समझने की भूल करता है .................।

Friday, May 20, 2011

मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम
एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे,
चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे
जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........!
खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे
देखों मै तुम्हारे करीब हूं
फिर तुम मुझसे नाता क्यों
तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........!
एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं
वरना तो सभी रूसवा हो चले है
दिल को तो समझा ही लेना 
वह कब तक तुम्हे रोकेगा 
एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा......
फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा
किसे अपना मानते, जानते हो
कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब 
को अब तक न समझ पाये ...............
वही तो मुझे यहां ले आयी है
उसका और मेरा तो
बरसों पुराना साथ है ............
जहां खुशी जाती है मै छाया बन
उसके पीछे -पीछे चलता हूं
मै उसका साथ कभी नही छोडता 
और तुम खुशी की तलाश में
मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो 
अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां 
कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!! 

Tuesday, May 10, 2011

याद जब भी कोई आता है......

याद जब भी कोई आता है 
मन उदास हो जाता है ।
वैसे तो अपने कम ही है
दोस्त जो मिले सब अच्छे मिले....
वक्त ने कभी हौंसला न दिया
पल भर बात कर सके 
वजह भी तो कभी न पायी........
भावनाओ के अथाह समन्दर में 
डूबते है उतरते है पार जाने 
की कितने ही कोशिशों में
बस नाकाम से नजर आते है।
याद जब भी आती है
गमगीन नजारे हो जाते है
यादों से परे रहने का 
अटूट फैसला जो किया है। 
कब तक अमल कर पायेगे
जिन्दगी से दूर कब भाग  पायेगे
भटकेगे फिर इन्ही अन्धेरों में
रोशनी की सहर कहां पायेगे.............!

Friday, February 18, 2011

मन से बोझिल है सारा जहां.....

मन से बोझिल है यह जहां सारा
चंचल कितना है यह मन.....
पल उडे ,पक्षी सी उडान 
पल में ठहरे यूं सागर सा
मन से चलता ,यह संसार
लडता है दिमाग .........
मन सा बावरा है क्या कोई
घबराता कभी तो कभी होता बचैन 
कभी प्रफुल्लित तो, नही कही चिन्ता........
कभी मरघट तो कभी महफिल.........
मन सा पागल कौन ।
लिखते कवि न जाने कितनी रचना
मन की थाह लेना न आसान
है यह रहस्य अनबूक्ष पहेली सा 
मन को पा सब को पा लो 
नही तो कौन जाने इस जग, जीवन में
 मन के मारो ने किये बडे बडे काम............।


Sunday, February 13, 2011

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही.........।

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही
देख मेरे हालात जाने क्या समझेगी........।
दूरिया आज क्यो है?
कल क्या था जो करीब थे............।
चुपके से छोड देगी मेरे दर को 
जाने कहां उसकी सहर होगी.........।
जो करते है अपनी खुशी कुर्बान 
क्या दूसरों को खुशी दे पाते है........।
करते है ढोग जीने का ढंग से मर भी नही पाते है.........।
वो कह देगी अलविदा
बदल कर अपना रस्ता 
मेरा सफर दोस्त कठिन जरूर है............।
यहां नफरत नही प्रेम से रोशन जहां है
एक दूनिया है ऎसी जहां मासूमियत है.........।
नही है चलाकियां दूनिया की
उससे कहो वह अपना रास्ता बदल दे.......।
गुमराह करे इससे पहले कोई उसे 
वापस उसका हसीन दूनियां में आने का इन्तजार है.........। 

Thursday, January 27, 2011

गैरो ने तो फिर भी गले लगाया है.....

आस्तीन में है कुछ सांप 
डसने को है हर दम तैयार 
इनको सर उठाने न दो 
एक बार जो उठ गये 
इनका डसना जरूर है।


दोस्तो दोस्ती जरूरी है
पर आस्तीन के सांपों से
बचना भी जरूरी है।
बेगानो की इस दूनिया में
विश्वास कहां से पायेंगे


जो करोगे भरोसा धोखा भी तो खायेगे.........।
भरोसा एक नियति है
इससे कब तक बच पाआगे 
मेरे अपने कहां अपने बन पाये है 
गैरों ने तो फिर भी गले लगाया है..........।

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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