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Showing posts from November 3, 2009
मासूम चेहरो से, डर लगता है
इनकी तल्खी, शोखिया, अदाये
होती है कातिलाना
चेहर, जो चलाते है नश्तर
कैसे कहूं इन नश्तरों से डर लगता है
मासुम आंखे दिलों में चलाकिया
चलाकियों से, डर लगता है!
कत्ल कर जाते है खामोशी से
उफ! भी नही जरा,
मासूम चेहरो से दूर रहना है
इनकी जिदे ,इनकी दीवानगी
रो कर हर बात मनवा लेना
चेहरों ने गुनाह करवाये है !
आइना दिखा देता है फितरत एक दिन
सौ बार जो मुंह छिपाये है !
मासूम चेहरों से डर लगता है !
होती है इनकी बाते निराली
हर शह को दूर कर दो
चेहरों पर लगे है चेहरे ,
बन्द कर लिया है आंखो को
हां ! मासूमचेहरों से डर लगता है......।