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Showing posts from March, 2010

दिल कितना नादान है.......।

दिल कितना नादान हैकरता कितनी खताये है कुछ माफी के काबिल तो कुछ न माफ़ी के काबिल इस दिल ने कितना रुलाया है देख तुझको करीब होता नही एतबार है तडपे कितना रात दिन इन्तजार नजरों का था........ वो सामने रहा हम अन्जान रहे दिल कितना परेशान है इतना उछलना कि बाद में रूयेगा। ऎ दिल अब सभंल जा गिर गया तो उठ न पायेगा दिल नदान है इसकी न सुन उसकी मासुमियत एक छलावा किस राह पर यू चलता है गिरना फिर संभलना एक फितरत है दिल तो बस नदान है.............................।

यह राहे बडी मुश्किल..........

कभी आस मां को रोते हुए देखा है प्यार का नाम दे रिश्तों को खत्म होते देखा है वो नही जानता दर्द से बोझिल राहे खो जाती है मंजिल तक जाने में......... रह जाते है सिलसिले मायुसियों के कभी बादल को गरजते देखा है वो मिटा देता है खुद को फिर क्या रह जायेगा धरती ताकती आसमां को आसमां कहां देखता है.............. प्यार में कत्ल भी हो जाते है रोक लो बहकते कदमों को हासिल कुछ न हो पायेगा जिसे कहते वफा वो पागलपन है.................... कुछ भी न कह करे करे जो बात वही तो बात होती है यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है...............................