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Showing posts from April, 2010
लिफाफे में रखे खत का कोई वजुद नही होता ......... अनकही कहानी उधडते रिश्तों की जबान नही होती दर्द सिर्फ सहने के लिए होता है दर्द की कोई हद नही अब फीकी हंसी हंसते है लब खुद को कहां अधेरों में तलाश करते है खेल जो समझे जिन्दगी को उनको रोको जिन्दगी खेल नही लहुलुहान करते है शब्द शब्दों से चोट न करो जो कुछ मौत के करीब है वो कितना खुशनसीब है कोई तो गले लगाने की ख़्वाहिश रखता है जो दे सके सिर्फ खुशी यह जरूरी तो नही गुलाब भी कांटों संग रहता है नही करता कांटो से शिकायत कोई सुखे किताबों में पडे फूलों से क्या महक आती है इतने संगदिल कैसे होते लोग खुदा से डर न कोई खौफ होता है लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता....... इस जहां में किसे अपना कहे अपनों से परायों की बू आती है तडपतें जिनके लिए उनका कुछ पता नही होता सचमुच बंद लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता...........।
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अपनी खुशी को बचा कर रखना..........

तपती धुप झुलसते मनखोजे कही अपनापन नही कुछ पास बस वीरानियां क्यों होता इस तरह क्या प्रेम का यह एक दौर है........... क्या हासिल दूनिया से लडकर खालीपन........ हां बस तन्हाई प्यार है तो बंधन क्यों बंधनो में घुट जायेगे... क्यों मांगते उम्मीदों की भीख हाथ नही भरे तुम्हारे... किससे प्यार चाहतें हो पत्थर कहती दूनियां जिसकों सिर उसपर झुकाते क्यों है लोग रूसवा करते मोहब्बतों को जान कर भी प्यार दिखाते क्यों हो छीन लेते खुशियों को दोस्तों अपनी खुशी को सबसे बचा कर रखना..................।