Monday, March 8, 2010

यह राहे बडी मुश्किल..........


कभी आस मां को रोते हुए देखा है
प्यार का नाम दे रिश्तों को खत्म होते देखा है
वो नही जानता दर्द से बोझिल
राहे खो जाती है मंजिल तक जाने में.........
रह जाते है सिलसिले मायुसियों के
कभी बादल को गरजते देखा है
वो मिटा देता है खुद को
फिर क्या रह जायेगा
धरती ताकती आसमां को
आसमां कहां देखता है..............
प्यार में कत्ल भी हो जाते है
रोक लो बहकते कदमों को
हासिल कुछ न हो पायेगा
जिसे कहते वफा वो पागलपन है....................
कुछ भी न कह करे करे जो बात
वही तो बात होती है
यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है...............................

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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