Thursday, December 31, 2009

नित नवीन सृजन करे.....!

नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे ।

खिले फुल महके गुलशन 
सरस किरणों का स्वागत करे ......................!
गुजित भंवरे,गुनगुन स्वर 
रिमझिम फूहार की कामना करे 
जीवन हो सरल
दिशायें दीप्तमान नवीन प्रहर का इन्तजार करें........!  
नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे
दुख भ्रम की किचिंत छाया न हो
सुखों की अल्पविराम रागिनी हो
एक नवगीत को साज आवाज दे........................!
नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे। 

Monday, December 21, 2009

खुदाया मुझे रहमतो का एक समुन्दर दे दे.................


खुदाया मुझे रहमतो का एक समन्दर दे ............
डूब जाउ मै तेरी इबादत में इतना
के कोई मुझे हटा न सके।
खुदाया मुझे उजली धुप का आंगन दे दे।
रख सकूं हर एक महरूम हो चुके, खुशी से बन्दे को 
एक जमी ऎसी जहां नफरत
पांव न जमाती हूं सिर्फ तेरी नूर से सरोबार दीवारे हों

खिलते हो फूल चट्टानों पर भी
मुस्कुराता एक गुलशन दे दे।
वो जो देखा था अक्स तेरा
हर दीदार में वो नजर दे दे।
तेरी इबादत में लूटा दूं अपना सबकुछ
तू सिर्फ एक झलक दे दे।
खुदाया मुझे रहमतों का एक समुन्दर दे दे...............।

Tuesday, December 15, 2009

धुंध.............

धुंध- धुंध, धुआ- धुआ.........।
जिन्दगी बढती गयी
कांरवा चलता गया
दूर तक खामोशी और साये
आहटे बढती हौले हौले............।

रफ्तार जो थमती नही 
आसुओ की रौ
तन्हाईया शोर मचाती है।
सारी परेशानियों का सबब
ऎ दिल अब तो संभल
बहके कदमों को संभाले
चलते रहे बस चलते रहे...........।
किसकों पुकारे इस राह पर
देखो कितना अंधियारा है
रफता रफता वक्त कटता
गुम होता उजियारा.........।
पुरवाई से कहो यहां न आये
तेरा दर यहां से दूर है।
दबे पांव मुस्कुराते है हौठं 
मुस्कुराहट बैरी है।

धुंध-धुंध धुआ -धुआ................।

Saturday, December 12, 2009

एक शाम .......

एक शाम और तुम, दोनो कितने करीब हैं।
किसे भूले किसे याद करे
दोनो मेरे अपने है........

डुबता सूरज और समन्दर
जैसे डुबती हर सांस है
एक पल और एक गम
दोनो मेरे अपने है.............
किसे भूले किसे याद करे
फासले बढते जाते है

रह नुमा वो नही 
सैलाब है हर तरफ
अंधियारा घिर आये............
कैरे सवेरे की राह तके
किसे भूले किसे याद करे 
वक्त बहा ले जाता है.............................
गम एक दरिया,
मौजो का आना जाना 
एक बूत और चट्टान 
किसे भुले किसे याद करे.....................।
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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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