Friday, January 11, 2013

बाते करती हो चांद तारों की..........!

बाते करती हो
चांद -तारों
किस्सों की,
 कहानियों की
परीलोक की बातें 
परीलोक में ही हो तो 
अच्छा है।
चांद का आना 
जमीं पर तारों 
का खिलखिलाना 
सितारों की बाते
सितारों से हो तो
अच्छा है। 
जमीं पर 
इन्सानों का 
अरे नही 
अब तो वह
भी बदलता 
जा रहा है ।
बाते करती हो
इन्सानों की ,
इन्सानों की 
बाते इन्सानों से
 करो धरती पर
इन्सानों का तो 
पता नही भूल
जाओ पुराने 
जमाने को
अच्छा है। 

3 comments:

  1. अब इंसान बसते ही कहाँ हैं धरती पर .... अच्छी प्रस्तुति

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  2. अब इंसान नहीं हैवान बसने लगी हैं धरती पर ...
    भावमय प्रस्तुति ...

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  3. बहुत शुक्रिया, आपने अपना समय दिया व व इस रचना पर कमेंट किये आभार।

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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