Friday, October 22, 2010

कोई तो है.................।

कोई  तो है जो कहे 
चलो चार कदम मेरे साथ
इस दुनिया में वरना 
कहां अपनों को तलाश करे
कैसे कहे जख्म कितने खाये है
अजनबियों से कहो 
उन पर भरोसा कैसे करे
हर कदम सोचे तो उठाये
जिन्दगी को कह दो न इतराये
कभी -कभी जिन्दगी भी साथ छोड देती है
कौन है फिर अपना वो साया 
कही खुद की परछाइयाँ तो नही 
सच किसे मान लूं
मै या मेरी परछाई
कौन चलता है साथ-साथ
तू ही तो एक अपनी है जो
अन्त तक साथ निभायेगी 
वरना तो सबकुछ धुआं हो जायेगा
न तुम होगे न कोई गम सताने वाला
वो जो तन्हाई का सहारा है
वही तो बस एक अपना है
जग झूठा ,जीवन, जीने मरने का फेरा है
मान लो मेरी बात सच कुछ नही 
बस एक सच है, जो आज है, वो कल न होगा...........। 

5 comments:

  1. bahut sateek baat ..jo aaj hai kal nahi hoga

    sundar abhivyakti

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  2. bahut khoob Sunita ji..........mai to fan ho gaya apka

    regards
    sanjay

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  3. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं

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  4. परिवर्तन ही सत्य है.......!

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  5. पर अंधेरा आने पर अपनी परछाई भी साथ छोड़ देती है ...
    गहरे जज़्बातों को लिख है आपने ...

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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