Tuesday, January 26, 2010

तुम हो हम है फिर साथ चलता है फासला..........।

तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला
सवाल बस सवाल बीच में एक भंवर सा
डूबते उतरते तूफानों से घिर जाते है
फडकती आंखे ,डर अन्जाना सा
क्यों कश्ती को साहिल की दरकार नही
शुष्क होठ, शबनम का कतरा नही

मन करता उड चलुं आसमानों तक
कैसे आसमां तो बहुत दूर है
दिल तक जो पहूचं वो आवाज कहां है।
किसको तलाशता है तूं प्यार एक फसाना है
खामोशी से राह नही मिलती 
चीखने से पुकार नही बनती
सवाल बस सवाल बीच में एक भंवर सा
तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला.....................। 

5 comments:

  1. सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है।

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  2. तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला.....................।

    अच्छी कशमकश है ।
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें।

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  3. किसको तलाशता है तूं प्यार एक फसाना है
    खामोशी से राह नही मिलती
    चीखने से पुकार नही बनती
    सवाल बस सवाल बीच में एक भंवर सा
    तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला....................

    कभी कभी जीवन भर साथ चलते रहते हैं पर फांसले बने रहते हैं ........ भंवर जैसे उलझे मन की पीड़ा से निकली रचना .........

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  4. सुगढ़ अभिव्यक्ति!

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  5. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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