Thursday, January 14, 2010

दिल क्या चाहता है............।

दिल क्या चाहता है,यह चाहत से अन्जान है.............।
आती हई बर्फीली हवाओ से पूछो

तूफान का कोई पैगाम है क्या
एक मोड जो छोड आये हम
उस मोड से गुजरने का क्या इरादा है
हसीन वादियों तारों के
 टूटने का इन्तजार न करो
 मांगू एक मुराद ऎसी
 कोई ख्वाहिश तो नही
दिल क्या चाहता है,यह चाहत से अन्जान है..........।
सरगोशियां सी कानो में
उसको आवाज न दों
अरमान मचल गये तो 
बहुत कोहराम मचायेगें
बहारों को गुजर जाने दो
ख्वाबों के जहां में जाने दो।
दिल क्या चाहता है, यह चाहत से अन्जान है..............।

8 comments:

  1. रचना का यह भाव कि चाहत से अन्जान।
    यह भी बेहतर ही लगा मचल रहे अरमान।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. अच्‍छी अभिव्‍यक्ति !!

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  3. सरगोशियां सी कानो में
    सहज सरल और सच्ची अभिव्यक्ति -शुभकामनाये.

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  4. बहुत अच्छी अभिव्यक्ति।

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  5. अरमान मचल गये तो
    बहुत कोहराम मचायेगें

    बहुत कशिश है इन लफ़्ज़ों में।
    सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  6. अच्‍छी अभिव्‍यक्ति प्रस्तुति के लिए धन्यवाद ...

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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