Thursday, December 31, 2009

नित नवीन सृजन करे.....!

नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे ।

खिले फुल महके गुलशन 
सरस किरणों का स्वागत करे ......................!
गुजित भंवरे,गुनगुन स्वर 
रिमझिम फूहार की कामना करे 
जीवन हो सरल
दिशायें दीप्तमान नवीन प्रहर का इन्तजार करें........!  
नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे
दुख भ्रम की किचिंत छाया न हो
सुखों की अल्पविराम रागिनी हो
एक नवगीत को साज आवाज दे........................!
नव वर्ष नव कल्पना 
नित नवीन सृजन करे। 

7 comments:

  1. नव वर्ष नव कल्पना
    नित नवीन सृजन करे।

    सुन्दर कामनाएं, नव वर्ष के लिए, सुनीता जी ।
    आप और आप के समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. नव वर्ष नव कल्पना
    नित नवीन सृजन करे.......

    आमीन .......... बहुत आशावादी सुंदर रचना .......
    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की मंगल कामनाएँ ........

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  3. इस सृजन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. सभी को नव वर्ष की ढेरो शुभकामनाएं,आपकी इस हौसलाअफजाई
    के लिए मै शुक्रगुजार हुं इससे मेरे लेखनी को पंख लग जाते है वो सिर्फ उडने लगती है ताकि मै कुछ ऎसा और लिखू जो सभी को पसन्द आये व जिसमें सार्थकता भी हो.....

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  5. Sundar geet....mubarakvad.

    नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !!! नव वर्ष-2010 की ढेरों मुबारकवाद !!!

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  6. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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