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हे कृष्ण, हे गोपाल !

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

हे कृष्ण , हे गोपाल , हे माधव
किस नाम से पुकारू तुम्हे !
कान्हा , बांसुरी बैजया
देवकी नन्दन , हे कैन्हया
किस रूप में निहारू तुम्हे |

हे पालनहार , हे जगत के रखवाले
किस तरह पूँजू तुम्हे |
तुम्हे माता हो तुम्ही पिता हो
किस तरह रिश्तें में बाँधु तुम्हे |

हे मदनमुरारी , हे यशोदा के लाल
क्या कह प्रीत निभाऊ तुमसे
तुमसे जीवन की आस
तुम्हे खो कर जी न पांऊ मै |

हे कृष्ण , हे गोपाल ....

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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सुनीता शर्मा खत्री
©



Comments

  1. बहुत सुन्दर प्रार्थना स्वरुप कान्हा सन्मुख ..

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद |

      Delete

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तुम ही तो हो !!

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कहाँ जाऊ तेरी यादों से बचकर
हर एक जगह बस तू ही है
तेरा प्यार तेरा एकरार, तेरी तकरार
हरदम मुझमें समाया है
मेरी रूह में बस तेरा ही साया है,
हमसफर बन साथ निभाना था
बीच राह में ही छोड दिया तन्हा मुझकों
दिन ढलते ही तेरी
यादें मुझे घेर लेती है
तू ही है हर जगह .............
हवायें भी यही कहती है
क्यो लिया लबों से मेरा नाम
जब मुझसे दूर ही जाना था |
फिर हमसे न जीया जायेगा
तेरे बिन जिन्दगी का जहर
 न पीया जायेगा, मासूम है
 यह दिल बहुत...
हर लम्हा तूझे ही
याद करता जायेगा |

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मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम
एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे,
चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे
जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........!
खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे
देखों मै तुम्हारे करीब हूं
फिर तुम मुझसे नाता क्यों
तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........!
एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं
वरना तो सभी रूसवा हो चले है
दिल को तो समझा ही लेना 
वह कब तक तुम्हे रोकेगा 
एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा......
फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा
किसे अपना मानते, जानते हो
कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब 
को अब तक न समझ पाये ...............
वही तो मुझे यहां ले आयी है
उसका और मेरा तो
बरसों पुराना साथ है ............
जहां खुशी जाती है मै छाया बन
उसके पीछे -पीछे चलता हूं
मै उसका साथ कभी नही छोडता 
और तुम खुशी की तलाश में
मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो 
अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां 
कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!!