Monday, February 4, 2013

आस का सूरज बनना तुम........!

जब भी थक कर सोने लगु मै
आकर हौल से जगा देना तुम
रिश्तों का भंवर है जिन्दगी
उलझनों को  सुलझाना तुम
कटता है वक्त प्यार के सहारे
इस प्यार को जुदा न करना तुम
तमन्नाओ का समन्दर
कही लहरों से न टकराना
रिश्तो ने ही द्धन्द्ध मचाया है
देखो यह रिश्तें टूटे ....... न
जब भी छाये मायूसियों के बादल
आस का सूरज बनना तुम
मेरे ख्याल मेरे अपने ही सही 
थोडी जगह तो बना लेना
न मिल सको गर इस जन्म
अगले जन्म का इन्तजार 
करने का हौसला करना तुम
जब भी सपने आये 
उनसे कहना मेरा ही दीदार हो
गरजे मेघ और हो बरसा
जान लेना याद आये तुम
जब सोने लगु ,हौले से जगा देना तुम................!


1 comment:

  1. प्रेम भाव लिए ... मनके कोमल स्वर ...

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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