Wednesday, August 18, 2010

टूटे रिश्तों की खनक........।

खत्म होते रिश्ते को जिन्दा कैसे करू
जो रूठा है उसे कैसे मना पाउ
कहुं कैसे तू कितना अजीज है
सबका दुलारा प्यारा भाई है
याद आते वो दिन जब
पहली बार तू दूनिया मे आया
हम सबने गोद में उठा
तूझे प्यार से सहलाया
रोते रोते बेदम तूझ नन्हे बच्चे को
मां के कपडे पहन मां बन तूझे बहलाया
कैसे बचपन भूल गया
आज  बडा हो गया कि
बहनों का प्यार तौल गया
सौदा करता बहनों से अपनी
अन्जानी खुशियो का
वह खुशियां जो केवल
फरेब के सिवा कुछ भी नही
जख्मी रिश्ते पर कैसे मरहम लगाउ ।
आंखे थकती देख राहे तेरी
पर नही पसीजता पत्थर सा दिल तेरा
बैठा है दरवाजे पर कोई हाथ में लिए
राखी का एक थागा, आयेगा
भाई तो बाधूगी यह प्यार का बंधन
वह जो बंधन से चिढता है
रिश्तों को पैसो से तौलता है
आया है फिर राखी का त्यौहार
फिर लाया है साथ में
टूटे रिश्तों की खनक.....................।
जान लो यह धागा अनमोल है
प्यार का कोई मोल नही
इस पवित्र रिश्ते सा दूनिया में रिश्ता नही ................।
               .....................

11 comments:

  1. रक्षाबंधन के अवसर पर भाई की याद में सुंदर रचना बधाई

    ReplyDelete
  2. संवेदनात्मक प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. आने वाले रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष में एक बहुत मार्मिक रचना ।
    भाई बहन का रिश्ता तो अटूट होता है । फिर कैसे कोई भाई रूठ सकता है ।

    ReplyDelete
  4. आप की रचना 20 अगस्त, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    ReplyDelete
  5. आज लगता है सारे रिश्ते बस तुल ही रहे हैं ....बहुत मार्मिक रचना ...

    रक्षाबंधन की शुभकामनायें

    ReplyDelete
  6. बैठा है दरवाजे पर कोई हाथ में लिए
    राखी का एक थागा, आयेगा
    भाई तो बाधूगी यह प्यार का बंधन
    वह जो बंधन से चिढता है


    sundar abhivyakti, aur bhaion ke liy ebehno ka
    ek sandesha bhi

    badhai,

    ReplyDelete
  7. संबंधों की डोर धागों से पक्के नहीं होते...ये तो अंतर्मन से जुड़े हों तो होते हैं,न हो तो नहीं होते..

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर भाव लिए कविता |बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  9. बहुतर मार्मिक ... एक बहन के टूटे दिल से निकली सदा ....
    इस पवित्र बंधन को भुलाने वाले इंसान नही होते ....

    ReplyDelete
  10. bahut accha likha h apne
    m bhi blog ikhti hu aap ek bar dekh le
    link h
    www.deepti09sharma.blogspot.com

    ReplyDelete

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

Blog Archive

About Me