Sunday, June 20, 2010

जिन्दगी छीन जीने को कहते हो तुम......।

जिन्दगी छीन, जीने को कहते हो तुम
दोस्ती का नाम दे दुश्मनी निभाते हो हो तुम...
क्या गम है क्यो उदास हो........

ताउम्र का गम दे हाल जानना चाहते हो 
तडप पर तडप दे, खुशी का वादा करते हो
मुझसे छीन कर हर खुशी मेरी
कैसी वफा की रीत निभा रहे हो ........
जिसे प्यार कहते हो वह एक ढोग है
इस ढोंग का कब तलक निभा सकोगे तुम।

जिन्दगी छीन,जीने को कहते हो तुम
आरजुओ के दरवाजे बार-बार नही खुलते
अहसासों के समन्दर बार.बार नही उठते ........।     

जो कहता है मै अपना हूं
अपना होकर भी मुझसे अन्जाना क्यों है
क्या उम्मीद पत्थर  और पागलों से
जो चाहे , जहां ठोकर खाते है........। 

जिन्दगी छीन ,जीने को कहते हो तुम
दोस्ती के नाम पर दुश्मनी निभाते हो तुम......। 

2 comments:

  1. जिन्दगी छीन ,जीने को कहते हो तुम
    दोस्ती के नाम पर दुश्मनी निभाते हो तुम....

    Bahut khoob ... dil se likhi rachna ...

    ReplyDelete
  2. शिल्प मे कुछ और मेहनत्र ज़रूरी है

    ReplyDelete

कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

Blog Archive

About Me