
कभी आस मां को रोते हुए देखा है
प्यार का नाम दे रिश्तों को खत्म होते देखा है
वो नही जानता दर्द से बोझिल
राहे खो जाती है मंजिल तक जाने में.........
रह जाते है सिलसिले मायुसियों के
कभी बादल को गरजते देखा है
वो मिटा देता है खुद को
फिर क्या रह जायेगा
धरती ताकती आसमां को
आसमां कहां देखता है..............
प्यार में कत्ल भी हो जाते है
रोक लो बहकते कदमों को
हासिल कुछ न हो पायेगा
जिसे कहते वफा वो पागलपन है....................
कुछ भी न कह करे करे जो बात
वही तो बात होती है
यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है...............................।
जिसे कहते वफा वो पागलपन है.
ReplyDeleteकुछ भी न कह करे करे जो बात
वही तो बात होती है
यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है....
इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....
हर रंग को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
ReplyDeleteजिसे कहते वफा वो पागलपन है.........
ReplyDeleteक्या बात है ... जुदा सा ख्याल है ..
ये राहें बड़ी मुश्किल , पर चलने की ज़रुरत है --
ReplyDeleteबहुत खूब।
असाधारण शक्ति का पद्य
ReplyDeleteअच्छा लिखा है.
ReplyDeleteजारी रहें.
अच्छी रचना ।
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