Friday, February 12, 2010

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया........।

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया
नफरत और गम
इसके सिवा कुछ न दिया ?
वक्त तूं कब तक मेरा इम्तहान लेगा
तेरे सबब का कही तो अन्त होगा
रूसवा करे मुझे जमाना
के वफा करने वाले के हिस्से ,
सिर्फ यही एक सौगात आती है
जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया
उलझन और परेशानी ?
इसके सिवा कुछ न दिया
मोड दो वक्त की धारा को
कह देना होता है आसान
सितम पर सितम
तमन्नाओ की ख्वाहिशों की कीमत क्या होती है
जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया
ताउम्र का दर्द
इसके सिवा कुछ न दिया...................।

13 comments:

  1. आपने दिल के जज्बातों को शब्दों में उतारने की अच्छी कोशिश की है .

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  2. सच है जिंदगी बस दर्द ही देती है .... पर फिर भी जिंदगी हसीन है .....
    .... आपको महा-शिवरात्रि की बहुत बहुत बधाई .....

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  3. धन्यवाद् - जीवन के एक पहलू दर्शाने का सार्थक प्रयास - शुभकामनाएं

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  4. jindgi ko dekhne ka najariya badaliye
    positive thinking aapko bhi khush rakhegi aur hme bhi
    waise poem dardili hai

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  5. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।बधाई।

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  6. दर्द और प्यार दोनों पहलूँ है जिंदगी के बस इसी के साथ जीना ही तो जिंदगी है..बढ़िया अभिव्यक्ति...

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  7. जिंदगी में उतार चढ़ाव होते ही हैं।
    एक रूप का मार्मिक वर्णन।

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 13.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

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  9. जज्बातों को खूबसूरती से लिखा है...

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  10. जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया.............कभी एक टीस उठती है जब सोचते है शिदृत से तो यही नही जान पाते जिन्दगी को जिन्दगी से क्या मिला।सभी के कमेंट का अभार प्रकट करती हूं सही कहा है यह सब मनोभाव है कभी सकारात्मक तो नकारात्मक पर जब रिशतों में ईमानदारी न हो स्वार्थ हो तो बहुत बुरा लगता है पर कभी किसी को मुकम्मल जहां नही मिलता..........

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  11. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।बधाई।

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कभी बहुत ही भावपूर्ण हो जाते है जज्बात हमारे हमारी भावनाये जिन पर जो चाहो कोई जोर नही इ

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