Skip to main content

Posts

आने वाला पल क्या खेल रचायेगा.......!

हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा तूझे समझने की कशिश में यह वक्त गुजर जायेगा कभी लगता अपना कभी फरेब सा  धोखा सा कभी तो कभी अनजाना सा साया।  हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा कभी अपनो का साथ तो कभी जुदाई हर पल जीने की तमन्ना तो उचाट मन  जीवन को  जानने की राह में हरदम कुछ नया ही रहस्य उभर आया  चौकन्ना तो कभी लापरवाह सा  क्यों यह  साथ इतना खामोश सा रहा हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा । अब आने वाला पल क्या खेल रचायेगा कौन हंसेगा किसको रूलायेगा  आने वाले वक्त को क्या समझ पायेगा ।

Merry Chirstmas

wish u a Merry Chirstmas             wish u a Merry Chirstmas                         & wish u a happy new year wish u all the things u need in your life wish u all the blessings ,that u always wanted.

जहां होते हो ख्वाब सच........!

जहां होते हो ख्वाव सच एक ऎसी दूनिया कहां पाआगे  हर चेहरा हो मुस्कुराता  नही गम सिर्फ खुशियों का समुन्दर  इस जहां में तो मुमकिन नही  करे उम्मीद या मागें दुआ ऎसी ख्वाहिशें सिर्फ ख्वाहिशे ही होती है ।  क्या सोच यह जहां बनाया गया होगा क्या उसे अपनी इबादत पर  नही रहा भरोसा इस विश्वास की परीक्षा लेता  रहा हर बार...हर बार....! करते है अलविदा जाने कहां हो जाते है गुमशुदा तलाशों कितना भी वो नही मिलते  जो लगते है सबसे अच्छे। हम रोते है हंसते है  फिर नाचते है जैसे नचाना चाहे वो पर नही उसे अपनी दूनिया को थोडा तो बदलना होगा कब तक कहेगे बस अब नही देगे इम्तहां.........................! 

जीवन धारा: बेरहम है जिन्दगी.....!

जीवन धारा: बेरहम है जिन्दगी.....!

Happy Diwali For All

जीवन धारा: जो नही है साथ...................!

जीवन में कितने ही उतार चढाव आते है पर जीवन कभी नही रूकता अगर कभी तुम थकने लगो कुछ नये रंग भरो रोज के थकाने वाले ढर्रे को छोड हमेशा नया करत... पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे ....जीवनधारा http://chittachurcha.blogspot.com

वही लडखडाया क्यूं है?

साथ चलने का वादा! वादा तो फिर वादा है जरूरी तो नही इसको निभाना! जो कहता  रहा शख्श सभंलना,संभलना वही फिर, लडखडाया क्यूं है ? कौन समझे दिल की बातें ! यह तो बाजारों में बिकता है सौदेबाजी है प्यार, वफा सच्चाई गुजरे जमाने की अदा है। सच से मुंह न मोडो झूठे जाल फैलाये कितने रहबर है। जिसको समझते  हो तुम जिन्दगी वही तो मौत का सामान है! दावा करते है जो उम्र भर  साथ निभाने का ! यह साथ बीच सफर में छूटता क्यूं है ! भ्रम में खो अपनों से गुस्ताखियां ये तो खुदा को भी मंजूर नही है! पलट देता है वह पल में किस्मतें अपनी किस्मत पर रक्श करते जो है । पक्षी तू अकेला राह में  किसको अपना समझने की भूल करता है .................।