Skip to main content

वही लडखडाया क्यूं है?

साथ चलने का वादा!
वादा तो फिर वादा है
जरूरी तो नही इसको निभाना!
जो कहता  रहा शख्श
सभंलना,संभलना वही फिर,
लडखडाया क्यूं है ?
कौन समझे दिल की बातें !
यह तो बाजारों में बिकता है
सौदेबाजी है प्यार, वफा
सच्चाई गुजरे जमाने की अदा है।
सच से मुंह न मोडो
झूठे जाल फैलाये कितने रहबर है।
जिसको समझते  हो तुम जिन्दगी
वही तो मौत का सामान है!
दावा करते है जो उम्र भर 
साथ निभाने का !
यह साथ बीच सफर में छूटता क्यूं है !
भ्रम में खो अपनों से गुस्ताखियां
ये तो खुदा को भी मंजूर नही है!
पलट देता है वह पल में किस्मतें
अपनी किस्मत पर रक्श करते जो है ।
पक्षी तू अकेला राह में 
किसको अपना समझने की भूल करता है .................।

Comments

  1. निर्मोही की बेवफाई !

    दावा करते है जो उम्र भर
    साथ निभाने का !
    आजकल प्रेमियों के दावे भी नेताओं जैसे हो गए हैं .

    दिल से निकली रचना .

    ReplyDelete
  2. भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे, चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........! खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे देखों मै तुम्हारे करीब हूं फिर तुम मुझसे नाता क्यों तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........! एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं वरना तो सभी रूसवा हो चले है दिल को तो समझा ही लेना  वह कब तक तुम्हे रोकेगा  एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा...... फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा किसे अपना मानते, जानते हो कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब  को अब तक न समझ पाये ............... वही तो मुझे यहां ले आयी है उसका और मेरा तो बरसों पुराना साथ है ............ जहां खुशी जाती है मै छाया बन उसके पीछे -पीछे चलता हूं मै उसका साथ कभी नही छोडता  और तुम खुशी की तलाश में मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो  अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां  कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!!  

गूंजते है सन्नाटो में ......!!

अब वो बात कहा, जो कभी थी  गूंजते है सन्नाटो में  कह्कशे जोरो से  थी मुकमल कोशिश बस ....!! गमगीन सी है महफ़िल तेरी  वक्त कभी ठहरता नहीं  इंतजार कितना भी करो  जो आज है वो कल न होगा  जो कल होगा उसका बारे  क्या जान सका कोई कभी .....!!! परदे लाख डाल लो  सच पंख पसारता ही है  फिर टूटते है मासूम दिल  लगती है तोहमते वफ़ा पर  अब यहाँ क्या पायेगा  लाशो और खंडरो में  अतीत को क्या तलाश पायेगा  रहा एक सदमा सही, पर  हुआ यह भी अच्छा ही   चल गया पता अपनों में गैरो का  सभी अपने होते तो गैर  कहा जाते  अब तन्हाई में ख़ुशी का दीप जलता नहीं  बस है सिसकियाँ...और वीरानिया  देखना है वफाएचिराग जलेगा कब तलक   जो था गम अब उसकी भी परवाह नहीं..... l

तुम ही तो हो !!

************ कहाँ जाऊ तेरी यादों से बचकर हर एक जगह बस तू ही है तेरा प्यार तेरा एकरार, तेरी तकरार हरदम मुझमें समाया है मेरी रूह में बस तेरा ही साया है, हमसफर बन साथ निभाना था बीच राह में ही छोड दिया तन्हा मुझकों दिन ढलते ही तेरी यादें मुझे घेर लेती है तू ही है हर जगह ............. हवायें भी यही कहती है क्यो लिया लबों से मेरा नाम जब मुझसे दूर ही जाना था | फिर हमसे न जीया जायेगा तेरे बिन जिन्दगी का जहर  न पीया जायेगा, मासूम है  यह दिल बहुत... हर लम्हा तूझे ही याद करता जायेगा | ##