Skip to main content

Posts

Showing posts with the label चेहरे

Oh world Lovely world.....!

Oh world, Lovely world...  You are so big.........  Blue sky blue ocean Green mountains.......!  Your heart is so tiny  white snow white pure water  Oh world my imaginative world  You are so far.......!  I am little bird  Wants to fly and fly  you cut the wings  Oh world,  cruel world  why you so heartless  when sleep dreams are mine  but why are not......thy  Oh world,  Lovely world  Make me feel happy  Enjoy me everything Let me go where is my...world

जिन्दगी.........

एक सवाल मन में  आता है कभी-कभी जिन्दगी इतनी  दूर क्यों भागती है जब कोशिश करू छिटक देती है दामन बिखर जाते है हर ख्वाब मेरे जो बस रह गये बाकी जीने की हजार  वजहे पर सामने  आ जाती है......... एक तूझे ही प्यार क्यों है मुझसे दो चार पल होते है खुशी के मयस्सर रच देती है  अपना चक्रव्यूह बेबस सी निगाहे ताकती रह जाती है............ रह जाते है बस सवाल दर सवाल...........!

कुछ तो है उसके मेरे दरमियां...........

कुछ तो है उसके मेरे दरमियां फासला ही सही पुकारता है  मुझे ही  जब जरूरत पडी कुछ तो  है जो दिल धडकता है सांसे रूकती है कहने को डर ही सही जब खत्म हो सबकुछ कुछ तो रह जाता बाकी है आदत जो छुटती  नही, याद जो जाती नही। कुछ तो है उसके  मेरे दरमियां फासला ही सही..........!

था उसे भी इन्तजार.......!

था उसे भी इन्तजार  क्या सोच हाथ  बढाया होगा सन्नाटे से कहो चीख कर शोर न करे खामोश रह कर  हक अदा करे.........! कहां जा कर  खत्म होगा यह  अनजान सफर जो शुरू तो हुआ  पर खत्म होने  नाम नही लेगा..........! था उसे भी गुमां  अपने वजूद  पर इतराया तो होगा क्षण भर में चोटिल हुए  सपने .............! ख्वाबों को हकीकत से बावस्ता तो होना होगा.........!

बेचैन मन ......

घना कोहरा  बेचैन मन  जाने किसकी  तलाश में  फिर रहा दर ब दर दिशा या दिशा भ्रम  कहां ले जायेगा यह पागलपन सब तरफ ढूंढा फिर भी  सकूंन कहां उदासी का आलम अब मेरा इम्तहां भी क्या लेगा  मै इस उम्मीद पर  डूबा कि बचा लेगा दामन ओढ फरेब का मेरा ही  रहबर निकला जिसकी थी तलाश उसे ही नदारद पाया । वह खो जायेगा  गुमनामियों में फिर कौन  उसका अलख जगायेगा।

आने वाला पल क्या खेल रचायेगा.......!

हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा तूझे समझने की कशिश में यह वक्त गुजर जायेगा कभी लगता अपना कभी फरेब सा  धोखा सा कभी तो कभी अनजाना सा साया।  हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा कभी अपनो का साथ तो कभी जुदाई हर पल जीने की तमन्ना तो उचाट मन  जीवन को  जानने की राह में हरदम कुछ नया ही रहस्य उभर आया  चौकन्ना तो कभी लापरवाह सा  क्यों यह  साथ इतना खामोश सा रहा हर बरस की तरह यह बरस भी बीत जायेगा । अब आने वाला पल क्या खेल रचायेगा कौन हंसेगा किसको रूलायेगा  आने वाले वक्त को क्या समझ पायेगा ।

जहां होते हो ख्वाब सच........!

जहां होते हो ख्वाव सच एक ऎसी दूनिया कहां पाआगे  हर चेहरा हो मुस्कुराता  नही गम सिर्फ खुशियों का समुन्दर  इस जहां में तो मुमकिन नही  करे उम्मीद या मागें दुआ ऎसी ख्वाहिशें सिर्फ ख्वाहिशे ही होती है ।  क्या सोच यह जहां बनाया गया होगा क्या उसे अपनी इबादत पर  नही रहा भरोसा इस विश्वास की परीक्षा लेता  रहा हर बार...हर बार....! करते है अलविदा जाने कहां हो जाते है गुमशुदा तलाशों कितना भी वो नही मिलते  जो लगते है सबसे अच्छे। हम रोते है हंसते है  फिर नाचते है जैसे नचाना चाहे वो पर नही उसे अपनी दूनिया को थोडा तो बदलना होगा कब तक कहेगे बस अब नही देगे इम्तहां.........................! 

वही लडखडाया क्यूं है?

साथ चलने का वादा! वादा तो फिर वादा है जरूरी तो नही इसको निभाना! जो कहता  रहा शख्श सभंलना,संभलना वही फिर, लडखडाया क्यूं है ? कौन समझे दिल की बातें ! यह तो बाजारों में बिकता है सौदेबाजी है प्यार, वफा सच्चाई गुजरे जमाने की अदा है। सच से मुंह न मोडो झूठे जाल फैलाये कितने रहबर है। जिसको समझते  हो तुम जिन्दगी वही तो मौत का सामान है! दावा करते है जो उम्र भर  साथ निभाने का ! यह साथ बीच सफर में छूटता क्यूं है ! भ्रम में खो अपनों से गुस्ताखियां ये तो खुदा को भी मंजूर नही है! पलट देता है वह पल में किस्मतें अपनी किस्मत पर रक्श करते जो है । पक्षी तू अकेला राह में  किसको अपना समझने की भूल करता है .................।

याद जब भी कोई आता है......

याद जब भी कोई आता है  मन उदास हो जाता है । वैसे तो अपने कम ही है दोस्त जो मिले सब अच्छे मिले.... वक्त ने कभी हौंसला न दिया पल भर बात कर सके  वजह भी तो कभी न पायी........ भावनाओ के अथाह समन्दर में  डूबते है उतरते है पार जाने  की कितने ही कोशिशों में बस नाकाम से नजर आते है। याद जब भी आती है गमगीन नजारे हो जाते है यादों से परे रहने का  अटूट फैसला जो किया है।  कब तक अमल कर पायेगे जिन्दगी से दूर कब भाग  पायेगे भटकेगे फिर इन्ही अन्धेरों में रोशनी की सहर कहां पायेगे...... . ......!

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही.........।

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही देख मेरे हालात जाने क्या समझेगी........। दूरिया आज क्यो है? कल क्या था जो करीब थे............। चुपके से छोड देगी मेरे दर को  जाने कहां उसकी सहर होगी.........। जो करते है अपनी खुशी कुर्बान  क्या दूसरों को खुशी दे पाते है........। करते है ढोग जीने का ढंग से मर भी नही पाते है.........। वो कह देगी अलविदा बदल कर अपना रस्ता  मेरा सफर दोस्त कठिन जरूर है............। यहां नफरत नही प्रेम से रोशन जहां है एक दूनिया है ऎसी जहां मासूमियत है.........। नही है चलाकियां दूनिया की उससे कहो वह अपना रास्ता बदल दे.......। गुमराह करे इससे पहले कोई उसे  वापस उसका हसीन दूनियां में आने का इन्तजार है.........। 

इंसान और इंसान की फितरत ?

इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? बहुतेरे रंग भर लगता गिरगट सा स्वाग रचता ढोंग की दूनिया बसाता इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? पलभर में बना लेता गैरों को अपना भुला देता खुन के रिश्तों को लहु पानी बन बहता रगों में उजाड देता उसका ही चमन  जिसने दिया उसको जनम इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ?  अपनी बेबाकी से वो  दिलों को जख्मी कर देता है जो भर न सके वो नासुर बना देता है रौंदा इसने प्रकृति को  अपना आशियाना बना डाला कीमत जान की है बहुत सस्ती गर गरीब हो इन्सा कोई वही उसे मार डालता है  . इंसान का इंसान अब रिश्ता खत्म जो हो चला है इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ................. ....।
जख्म अब हंसते है न जाने मुझसे क्या चाहते है। हंसी है लबों पर फीकी सी   मायूसियो के दौर रहते है जिन्दगी को खेल समझा खिसकते पल हाहाकार  करते है, थोडा ठहर जा वक्त अभी सांस तो ले लूं न बुलाओ मुझे  चन्द लम्हे तो जी लूं क्या है फलसफा जब चाहो तो नही मिलता  न चाहो तो सब कुछ पास तुम्हारे नियति तेरे खेल न्यारे  तुने खुब ठगा है अब जख्म मुझ पर ही चिल्लाते .............है

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया........।

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया नफरत और गम इसके सिवा कुछ न दिया ? वक्त तूं कब तक मेरा इम्तहान लेगा तेरे सबब का कही तो अन्त होगा रूसवा करे मुझे जमाना के वफा करने वाले के हिस्से , सिर्फ यही एक सौगात आती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया उलझन और परेशानी ? इसके सिवा कुछ न दिया मोड दो वक्त की धारा को कह देना होता है आसान सितम पर सितम तमन्नाओ की ख्वाहिशों की कीमत क्या होती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया ताउम्र का दर्द इसके सिवा कुछ न दिया...................।

किसका चेहरा देखू तेरे चेहरे के बाद............।

किसका चेहरा देखूं तेरे चेहरा देख कर सजदा तूझे है मेरी हर ख्वाहिश के लिए नूर है तू ,इस जहां में कोई तेरे मुकम्मल नही.............। तेरे दम से कयामत है तेरे दम से दूनिया है मेरा तेरा कुछ नही रह जाना बस नाम तेरा किसका ओज है तेरे ओज सा..............................। किसका चेहरा देखू तेरा चेहरा देख कर वो कौन खुशनसीब है जो तेरा दीदार करता है हम तो बस ख्वाबों की दरकार करते है..................। तेरे दम से कलम स्याह होती है वरना मेरी कलम तो खाख है मेरे खुदा तू कब मुझे अपना अक्स दिखायेगा.......................? किसका चेहरा देखु तेरा चेहरा देख कर इन्तजार तेरा सिर्फ तेरा है तू मेरी जुस्तजू है सिर्फ आखिरी ख़्वाहिश है..............................।                        ..........................

उडान

बन्द होती सांसे यूं जीना भी कोई जीना है फडफडाते है पंख छूने को आकाश नये कुतरे पंख कैसे काई उडान भरे........ ! नन्ही चीडियां रश्क तूझसे  मिला खुला आकाश तूझे हवा भी कुछ कहती हौले-हौले......  ! टूटते बांध आशाओं के बन्द हो जाते  दरवाजे खुलने वाले एक मंजिल पा कर मंजिलों से दूरी है...... ! उम्मीद कहती हौले से कानों में तू क्योकर उदास है कोई सवेरा कोई सहर दाखिल होती ही है सफर बोझिल जरूर पर कट तो रहा है....... ! कतरे पंख ही सही उडान तो भर  आस मां देखता है राह तेरी बंधी मुठ्रठी खोल तो जरा फिर न कहना कही रोशनी नही...... ! एक दीप जला तो जरा पग पग धर, धरा नप जाये हौसला कर कदम तो बढा. ...................!        _______
कुछ भी न कह कर बहुत कुछ कह जाते है सबने सताया जी भर कर, अब तो गमों  को भी शर्म आती है हम पर! आदत जो होती है उसे मिटा ना कैसे कत्ल होता है अरमानों का देखो फितरत दूनिया कितनी मासूम है ! बांध  कर हाथों को क्या तलाश है वो मुकाम कहा रास्ता कहां कुछ भी न कर कह कर बहुत कुछ कह जाते है। हमने बना दिया मूरत को भी इन्सा  है काफी दम खम हममें वो छीन लेता है हर खुशी मुझसे  कैसा  हमसफर है मेरा मार डालता है कहकर, जिन्दगी  दे रहा हूं तूझे !
मासूम चेहरो से, डर लगता है इनकी तल्खी, शोखिया, अदाये होती है कातिलाना चेहर, जो चलाते है नश्तर कैसे कहूं इन नश्तरों से डर लगता है मासुम आंखे दिलों में चलाकिया चलाकियों से, डर लगता है! कत्ल कर जाते है खामोशी से उफ! भी नही जरा, मासूम चेहरो से दूर रहना है इनकी जिदे ,इनकी दीवानगी रो कर हर बात मनवा लेना चेहरों ने गुनाह करवाये है ! आइना दिखा देता है फितरत एक दिन सौ बार जो मुंह छिपाये है ! मासूम चेहरों से डर लगता है ! होती है इनकी बाते निराली हर शह को दूर कर दो चेहरों पर लगे है चेहरे , बन्द कर लिया है आंखो को हां ! मासूम   चेहरों से डर लगता है..... .।