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जहां होते हो ख्वाब सच........!

जहां होते हो ख्वाव सच
एक ऎसी दूनिया कहां पाआगे 
हर चेहरा हो मुस्कुराता 
नही गम सिर्फ खुशियों का समुन्दर 
इस जहां में तो मुमकिन नही 
करे उम्मीद या मागें दुआ
ऎसी ख्वाहिशें सिर्फ ख्वाहिशे ही होती है ।
 क्या सोच यह जहां बनाया गया होगा
क्या उसे अपनी इबादत पर 
नही रहा भरोसा
इस विश्वास की परीक्षा लेता 
रहा हर बार...हर बार....!
करते है अलविदा जाने कहां
हो जाते है गुमशुदा तलाशों
कितना भी वो नही मिलते 
जो लगते है सबसे अच्छे।
हम रोते है हंसते है 
फिर नाचते है जैसे नचाना चाहे वो
पर नही उसे अपनी दूनिया को
थोडा तो बदलना होगा कब तक
कहेगे बस अब नही देगे इम्तहां.........................! 

Comments

  1. हम रोते है हंसते है
    फिर नाचते है जैसे नचाना चाहे वो
    पर नही उसे अपनी दूनिया को
    थोडा तो बदलना होगा कब तक
    कहेगे बस अब नही देगे इम्तहां....

    ....बहुत गहन चिंतन...सुंदर अभिव्यक्ति...

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  2. गहन भावों का समोवश
    सार्थक व सटीक प्रस्‍तुति ।

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  3. बहुत सुन्दर रचना । कई अहसास छिपे हैं इसमें ।
    लेकिन आप लिखती बहुत कम हैं ।

    ReplyDelete
  4. इस रचना पर टिप्पणी करने के लिए सभी का बहुत धन्यवाद ,कम लिखने का कारण कभी वक्त की कमी तो कभी जब मन करता है तभी कीबोर्ड पर हाथ चलते है कोशिश रहेगी ज्यादा लिखने की । अन्य ब्लाग पर आप विजट कर सकते है । कमेंट मिलने से हौसला व मार्गदर्शन मिलता है।धन्यवाद।

    जीवनधारा http://chittachurcha.blogspot.com

    गंगा के करीब http://sunitakhatri.blogspot.com

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  5. जहां होते हो ख्वाव सच
    एक ऎसी दूनिया कहां पाआगे
    हर चेहरा हो मुस्कुराता
    नही गम सिर्फ खुशियों का समुन्दर
    इस जहां में तो मुमकिन नही ...

    कोशिश करी जाय तो इस दुनिया में भी मुमकिन है ये सब ... अच्छी प्रस्तुति ...

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