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जीवन धारा: जो नही है साथ...................!

जीवन में कितने ही उतार चढाव आते है पर जीवन कभी नही रूकता अगर कभी तुम थकने लगो कुछ नये रंग भरो रोज के थकाने वाले ढर्रे को छोड हमेशा नया करत... पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे ....जीवनधारा http://chittachurcha.blogspot.com

वही लडखडाया क्यूं है?

साथ चलने का वादा! वादा तो फिर वादा है जरूरी तो नही इसको निभाना! जो कहता  रहा शख्श सभंलना,संभलना वही फिर, लडखडाया क्यूं है ? कौन समझे दिल की बातें ! यह तो बाजारों में बिकता है सौदेबाजी है प्यार, वफा सच्चाई गुजरे जमाने की अदा है। सच से मुंह न मोडो झूठे जाल फैलाये कितने रहबर है। जिसको समझते  हो तुम जिन्दगी वही तो मौत का सामान है! दावा करते है जो उम्र भर  साथ निभाने का ! यह साथ बीच सफर में छूटता क्यूं है ! भ्रम में खो अपनों से गुस्ताखियां ये तो खुदा को भी मंजूर नही है! पलट देता है वह पल में किस्मतें अपनी किस्मत पर रक्श करते जो है । पक्षी तू अकेला राह में  किसको अपना समझने की भूल करता है .................।

मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे, चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........! खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे देखों मै तुम्हारे करीब हूं फिर तुम मुझसे नाता क्यों तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........! एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं वरना तो सभी रूसवा हो चले है दिल को तो समझा ही लेना  वह कब तक तुम्हे रोकेगा  एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा...... फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा किसे अपना मानते, जानते हो कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब  को अब तक न समझ पाये ............... वही तो मुझे यहां ले आयी है उसका और मेरा तो बरसों पुराना साथ है ............ जहां खुशी जाती है मै छाया बन उसके पीछे -पीछे चलता हूं मै उसका साथ कभी नही छोडता  और तुम खुशी की तलाश में मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो  अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां  कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!!  

याद जब भी कोई आता है......

याद जब भी कोई आता है  मन उदास हो जाता है । वैसे तो अपने कम ही है दोस्त जो मिले सब अच्छे मिले.... वक्त ने कभी हौंसला न दिया पल भर बात कर सके  वजह भी तो कभी न पायी........ भावनाओ के अथाह समन्दर में  डूबते है उतरते है पार जाने  की कितने ही कोशिशों में बस नाकाम से नजर आते है। याद जब भी आती है गमगीन नजारे हो जाते है यादों से परे रहने का  अटूट फैसला जो किया है।  कब तक अमल कर पायेगे जिन्दगी से दूर कब भाग  पायेगे भटकेगे फिर इन्ही अन्धेरों में रोशनी की सहर कहां पायेगे...... . ......!

मन से बोझिल है सारा जहां.....

मन से बोझिल है यह जहां सारा चंचल कितना है यह मन..... पल उडे ,पक्षी सी उडान  पल में ठहरे यूं सागर सा मन से चलता ,यह संसार लडता है दिमाग ......... मन सा बावरा है क्या कोई घबराता कभी तो कभी होता बचैन  कभी प्रफुल्लित तो, नही कही चिन्ता........ कभी मरघट तो कभी महफिल......... मन सा पागल कौन । लिखते कवि न जाने कितनी रचना मन की थाह लेना न आसान है यह रहस्य अनबूक्ष पहेली सा  मन को पा सब को पा लो  नही तो कौन जाने इस जग, जीवन में  मन के मारो ने किये बडे बडे काम............।

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही.........।

वो होठो से तो कुछ कहेगी नही देख मेरे हालात जाने क्या समझेगी........। दूरिया आज क्यो है? कल क्या था जो करीब थे............। चुपके से छोड देगी मेरे दर को  जाने कहां उसकी सहर होगी.........। जो करते है अपनी खुशी कुर्बान  क्या दूसरों को खुशी दे पाते है........। करते है ढोग जीने का ढंग से मर भी नही पाते है.........। वो कह देगी अलविदा बदल कर अपना रस्ता  मेरा सफर दोस्त कठिन जरूर है............। यहां नफरत नही प्रेम से रोशन जहां है एक दूनिया है ऎसी जहां मासूमियत है.........। नही है चलाकियां दूनिया की उससे कहो वह अपना रास्ता बदल दे.......। गुमराह करे इससे पहले कोई उसे  वापस उसका हसीन दूनियां में आने का इन्तजार है.........। 

गैरो ने तो फिर भी गले लगाया है.....

आस्तीन में है कुछ सांप  डसने को है हर दम तैयार  इनको सर उठाने न दो  एक बार जो उठ गये  इनका डसना जरूर है। दोस्तो दोस्ती जरूरी है पर आस्तीन के सांपों से बचना भी जरूरी है। बेगानो की इस दूनिया में विश्वास कहां से पायेंगे जो करोगे भरोसा धोखा भी तो खायेगे.........। भरोसा एक नियति है इससे कब तक बच पाआगे  मेरे अपने कहां अपने बन पाये है  गैरों ने तो फिर भी गले लगाया है..........।