Skip to main content

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा .....!

लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा
क्या कहा उसने
इतना तो बता दिया होता 
भुला तो दिया
दिल से जुदा कर दू
क्यों उसने क्या कर दिया 
भूले से ही सही 
कसूर तो बता देता
कर देता रुखसते मुहब्बत
अंधेरो  में जो चिराग 
जलाता रहा 
खुद ही शुरू करता है ....
कहानिया वो रोज नई
कैसे कहे  सितमगर से
 नहीं भुला सकते उसको
हर पल जो याद आता रहा 
लम्हा लम्हा वक्त गुजरता रहा
मशगूल रहा वो गैरो में
अपनों पर जुल्म करता रहा
चीखती है दीवारे मुझ पर 
उसकी आवाज का जादू छाया रहा 
कब टूटेगा तिलस्म .........
मायाजाल जो बुनता रहा 
रहता है बेपरवाह सा
करते रहें दुआ फिर भी 
उसे मिले हर ख़ुशी 
चाहता वो जो रहा 
लम्हा लम्हा वक्त 
गुजरता रहा ...........!

Comments

  1. एक आह भी निकले अपनी
    उसके लिए दुआ बन जाये।

    क्या खूब दिल के उदगार प्रकट किये हैं।
    उदासी में भी खूबसूरती है।

    ReplyDelete
  2. प्रेम का मायाजाल ऐसा ही होता है ...
    भावपूर्ण लिखा है ...

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मै तो खुशी का हमसाया हुं........

अपने गमो से कब तक भागोगे तुम एक दिन सब तुम्हारे पास आ ही जायेंगे, चीख कर कहेगे यह हम है जिनसे जिनसे तुम्हे बेपनाह प्यार है...........! खुशी को तुम कब तक तलाश करोगे देखों मै तुम्हारे करीब हूं फिर तुम मुझसे नाता क्यों तोडना चाहते हो,खुशी तो नकारा है.........! एक मै ही तो हूं जो तुम्हे घेरे रखता हूं वरना तो सभी रूसवा हो चले है दिल को तो समझा ही लेना  वह कब तक तुम्हे रोकेगा  एक दिन तो तुम्हे अपनाना ही होगा...... फिर कौन है इस दूनिया में तुम्हारा किसे अपना मानते, जानते हो कितने भोले हो, तुम खुशी के फरेब  को अब तक न समझ पाये ............... वही तो मुझे यहां ले आयी है उसका और मेरा तो बरसों पुराना साथ है ............ जहां खुशी जाती है मै छाया बन उसके पीछे -पीछे चलता हूं मै उसका साथ कभी नही छोडता  और तुम खुशी की तलाश में मुझको , सिर्फ मुझको पा लेते हो  अगर फिर तडपते हो, तो मेरा कहां  कसुर है मै तो बस.... खुशी का हमसाया हुं....................!!  

गूंजते है सन्नाटो में ......!!

अब वो बात कहा, जो कभी थी  गूंजते है सन्नाटो में  कह्कशे जोरो से  थी मुकमल कोशिश बस ....!! गमगीन सी है महफ़िल तेरी  वक्त कभी ठहरता नहीं  इंतजार कितना भी करो  जो आज है वो कल न होगा  जो कल होगा उसका बारे  क्या जान सका कोई कभी .....!!! परदे लाख डाल लो  सच पंख पसारता ही है  फिर टूटते है मासूम दिल  लगती है तोहमते वफ़ा पर  अब यहाँ क्या पायेगा  लाशो और खंडरो में  अतीत को क्या तलाश पायेगा  रहा एक सदमा सही, पर  हुआ यह भी अच्छा ही   चल गया पता अपनों में गैरो का  सभी अपने होते तो गैर  कहा जाते  अब तन्हाई में ख़ुशी का दीप जलता नहीं  बस है सिसकियाँ...और वीरानिया  देखना है वफाएचिराग जलेगा कब तलक   जो था गम अब उसकी भी परवाह नहीं..... l

गैरो ने तो फिर भी गले लगाया है.....

आस्तीन में है कुछ सांप  डसने को है हर दम तैयार  इनको सर उठाने न दो  एक बार जो उठ गये  इनका डसना जरूर है। दोस्तो दोस्ती जरूरी है पर आस्तीन के सांपों से बचना भी जरूरी है। बेगानो की इस दूनिया में विश्वास कहां से पायेंगे जो करोगे भरोसा धोखा भी तो खायेगे.........। भरोसा एक नियति है इससे कब तक बच पाआगे  मेरे अपने कहां अपने बन पाये है  गैरों ने तो फिर भी गले लगाया है..........।