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जीवन धारा: मां.......................!एक सुखद अहसास है...

जीवन धारा: मां.......................!






एक सुखद अहसास है...
: मां.......................! एक सुखद अहसास है मां का शब्द गहरी पीडा में मुक्ति का बोध थकान में आराम  जन्नत है उसकी गोद हर शब्द कम ...plz click on tittle for full post

Comments

  1. बहुत ही भावप्रणव
    ममतामयी माँ को नमन!!

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तुम ही तो हो !!

************ कहाँ जाऊ तेरी यादों से बचकर हर एक जगह बस तू ही है तेरा प्यार तेरा एकरार, तेरी तकरार हरदम मुझमें समाया है मेरी रूह में बस तेरा ही साया है, हमसफर बन साथ निभाना था बीच राह में ही छोड दिया तन्हा मुझकों दिन ढलते ही तेरी यादें मुझे घेर लेती है तू ही है हर जगह ............. हवायें भी यही कहती है क्यो लिया लबों से मेरा नाम जब मुझसे दूर ही जाना था | फिर हमसे न जीया जायेगा तेरे बिन जिन्दगी का जहर  न पीया जायेगा, मासूम है  यह दिल बहुत... हर लम्हा तूझे ही याद करता जायेगा | ##

जिन्दगी बस इतना बता दे.......

जिन्दगी बस इतना बता दे कौन सी हुई खता हमसे  दे भले ही गम के दौर पर सताने से पहले यह तो बता वह कौन सा है पल जहां खुशी करती है बसेरा जिन्दगी तूझसे नही है कोई शिकायत आरजू है इतनी सी क्या है वो कमी जो रह गयी है आज भी खुद से तन्हा बस जरा खफा ,खफा है...... बहुत कुछ समझने के फेर में कुछ भी न समझे। जिन्दगी बस इतना बता दे कौन है वह जो आस पास अन्धेरों को रोशनी में तब्दील करने का दम रखता है दामन जो उलझा हजार कांटो में अब गुलशन की उम्मीद क्यो करे ....... साथ है बस एक साया जुदा जुदा क्यो लगता है जिन्दगी बस इतना बता दे बहारों का क्या कही कुछ पता है कह दूं बहारो को यहां पर भी आये जो कहते है यह चमन है वह आग का दरिया लगता है जलते है पांव मेरे, कैसे अंगारे बिखरे है जिन्दगी बस इतना बता दे मेरे सवालो का जवाब कही  होगा................। 

गूंजते है सन्नाटो में ......!!

अब वो बात कहा, जो कभी थी  गूंजते है सन्नाटो में  कह्कशे जोरो से  थी मुकमल कोशिस बस ....!! गमगीन सी है महफ़िल तेरी  वक्त कभी ठहरता नहीं  इंतजार कितना भी करो  जो आज है वो कल न होगा  जो कल होगा उसका बारे  क्या जान सका कोई कभी .....!!! परदे लाख डाल लो  सच  पंख पसारता ही है  फिर टूटते है मासूम दिल  लगती है तोहमते वफ़ा पर  अब यहाँ क्या पायेगा  लाशो और खंडरो में  अतीत को क्या तलाश पायेगा  रहा एक सदमा सही, पर  हुआ यह भी अच्छा ही   चल गया पता अपनों में गैरो का  सभी अपने होते तो गैर  कहा जाते  अब तन्हाई में ख़ुशी का दीप जलता नहीं  बस है सिसकियाँ...और वीरानिया  देखना है वफाएचिराग जलेगा कब तलक   जो था गम अब उसकी भी परवाह नहीं..... l