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भड़ास blog: आखिर कब तक सहूंगी......

आखिर कब तक सहूंगी.......  http://bhadas.blogspot.com   पर   की इस कड़ी को पढे........

तू बता दे मुझे जिन्दगी.....

तू बता दे मुझे जिन्दगी कौन सा है मोड़ , जहां मुलाकात तो होगी एक तू है एक मै हूं दोनो की कशमकश की कभी तो हार होगी तू बता मुझे जिन्दगी इस बियाबां में किसकी दरकार करती है यहां आवाज  क्या सुनायी जाती है यहां अंधेरे रोशनी को हर पल तरसा करते है तू बता दे मुझे जिन्दगी इस रात की कभी तो कभी सुबह होगी तेरा दामन पकडा है अब अन्जामें वफा क्या होगी तू बता दे मुझे जिन्दगी किस गुनाह की सजा क्या तूने तय की है न जाने कब क्या हो हर पल खौफ के साये में पलती है जिन्दगी तू बता दे मुझे जिन्दगी आसमां में क्या तलाशती है यहां चाहत की इबारत पत्थरों से लिखी जाती है जो कर यह गुनाह उस क्यों मौत की आरजू न होगी.................

कोई तो है.................।

कोई  तो है जो कहे  चलो चार कदम मेरे साथ इस दुनिया में वरना  कहां अपनों को तलाश करे कैसे कहे जख्म कितने खाये है अजनबियों से कहो  उन पर भरोसा कैसे करे हर कदम सोचे तो उठाये जिन्दगी को कह दो न इतराये कभी -कभी जिन्दगी भी साथ छोड देती है कौन है फिर अपना वो साया  कही खुद की परछाइयाँ तो नही  सच किसे मान लूं मै या मेरी परछाई कौन चलता है साथ-साथ तू ही तो एक अपनी है जो अन्त तक साथ निभायेगी  वरना तो सबकुछ धुआं हो जायेगा न तुम होगे न कोई गम सताने वाला वो जो तन्हाई का सहारा है वही तो बस एक अपना है जग झूठा ,जीवन, जीने मरने का फेरा है मान लो मेरी बात सच कुछ नही  बस एक सच है, जो आज है, वो कल न होगा...........। 
दोस्त क्या है मेरे दोस्त दोस्ती का फलसफा क्या है लडते है, झगडते है फिर एक दूसरे के लिए मरते है कौन सच्चा है कौन झूठा है  आजमाने में उम्र गुजारते है......... दोस्त क्या है मेरे दोस्त  दोस्ती के मायने क्या होते है दोस्त बन निकालते है लोग  दुश्मनी, नफरतों को दोस्ती की  आड देते है फिर मतलब एक दूसरे से साधते है सच्चा दोस्त कौन है कैसे जाने कैसे पहचाने ? दोस्त क्या है मेरे दोस्त  दोस्ती का रिश्ता क्या है   जो न जाने दोस्ती का उसूल  दोस्तो, दोस्ती के पैमाने भी तय कर लो......... दोस्ती में धोखा न दो ,नफरत न दो  एक बार करो दोस्ती तो अन्त तक निभाओ  है रिश्ता यह पवित्र ,पर इन्सान इन्सान का दोस्त ......................................................................? यह कौन से जमाने की बात करते हो दोस्तो दोस्ती में कोई उम्र की सीमा न हो  कोई  आदमी औरत का भेद न हो अमीर गरीब की दीवार न हो  घमंड का नाम न हो, इन्सान जो हो पहले सच्चा  वही सच्चा दोस्त भी है........... दोस्त क्या है मेरे दो...

जिन्दगी बस इतना बता दे.......

जिन्दगी बस इतना बता दे कौन सी हुई खता हमसे  दे भले ही गम के दौर पर सताने से पहले यह तो बता वह कौन सा है पल जहां खुशी करती है बसेरा जिन्दगी तूझसे नही है कोई शिकायत आरजू है इतनी सी क्या है वो कमी जो रह गयी है आज भी खुद से तन्हा बस जरा खफा ,खफा है...... बहुत कुछ समझने के फेर में कुछ भी न समझे। जिन्दगी बस इतना बता दे कौन है वह जो आस पास अन्धेरों को रोशनी में तब्दील करने का दम रखता है दामन जो उलझा हजार कांटो में अब गुलशन की उम्मीद क्यो करे ....... साथ है बस एक साया जुदा जुदा क्यो लगता है जिन्दगी बस इतना बता दे बहारों का क्या कही कुछ पता है कह दूं बहारो को यहां पर भी आये जो कहते है यह चमन है वह आग का दरिया लगता है जलते है पांव मेरे, कैसे अंगारे बिखरे है जिन्दगी बस इतना बता दे मेरे सवालो का जवाब कही  होगा................। 

टूटे रिश्तों की खनक........।

खत्म होते रिश्ते को जिन्दा कैसे करू जो रूठा है उसे कैसे मना पाउ कहुं कैसे तू कितना अजीज है सबका दुलारा प्यारा भाई है याद आते वो दिन जब पहली बार तू दूनिया मे आया हम सबने गोद में उठा तूझे प्यार से सहलाया रोते रोते बेदम तूझ नन्हे बच्चे को मां के कपडे पहन मां बन तूझे बहलाया कैसे बचपन भूल गया आज  बडा हो गया कि बहनों का प्यार तौल गया सौदा करता बहनों से अपनी अन्जानी खुशियो का वह खुशियां जो केवल फरेब के सिवा कुछ भी नही जख्मी रिश्ते पर कैसे मरहम लगाउ । आंखे थकती देख राहे तेरी पर नही पसीजता पत्थर सा दिल तेरा बैठा है दरवाजे पर कोई हाथ में लिए राखी का एक थागा, आयेगा भाई तो बाधूगी यह प्यार का बंधन वह जो बंधन से चिढता है रिश्तों को पैसो से तौलता है आया है फिर राखी का त्यौहार फिर लाया है साथ में टूटे रिश्तों की खनक.....................। जान लो यह धागा अनमोल है प्यार का कोई मोल नही इस पवित्र रिश्ते सा दूनिया में रिश्ता नही ................।                .....................

जिन्दगी छीन जीने को कहते हो तुम......।

जिन्दगी छीन, जीने को कहते हो तुम दोस्ती का नाम दे दुश्मनी निभाते हो हो तुम... क्या गम है क्यो उदास हो........ ताउम्र का गम दे हाल जानना चाहते हो  तडप पर तडप दे, खुशी का वादा करते हो मुझसे छीन कर हर खुशी मेरी कैसी वफा की रीत निभा रहे हो ........ जिसे प्यार कहते हो वह एक ढोग है इस ढोंग का कब तलक निभा सकोगे तुम। जिन्दगी छीन,जीने को कहते हो तुम आरजुओ के दरवाजे बार-बार नही खुलते अहसासों के समन्दर बार.बार नही उठते ........।      जो कहता है मै अपना हूं अपना होकर भी मुझसे अन्जाना क्यों है क्या उम्मीद पत्थर  और पागलों से जो चाहे , जहां ठोकर खाते है........।  जिन्दगी छीन ,जीने को कहते हो तुम दोस्ती के नाम पर दुश्मनी निभाते हो तुम......।