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जिन्दगी बस इतना बता दे.......

जिन्दगी बस इतना बता दे कौन सी हुई खता हमसे  दे भले ही गम के दौर पर सताने से पहले यह तो बता वह कौन सा है पल जहां खुशी करती है बसेरा जिन्दगी तूझसे नही है कोई शिकायत आरजू है इतनी सी क्या है वो कमी जो रह गयी है आज भी खुद से तन्हा बस जरा खफा ,खफा है...... बहुत कुछ समझने के फेर में कुछ भी न समझे। जिन्दगी बस इतना बता दे कौन है वह जो आस पास अन्धेरों को रोशनी में तब्दील करने का दम रखता है दामन जो उलझा हजार कांटो में अब गुलशन की उम्मीद क्यो करे ....... साथ है बस एक साया जुदा जुदा क्यो लगता है जिन्दगी बस इतना बता दे बहारों का क्या कही कुछ पता है कह दूं बहारो को यहां पर भी आये जो कहते है यह चमन है वह आग का दरिया लगता है जलते है पांव मेरे, कैसे अंगारे बिखरे है जिन्दगी बस इतना बता दे मेरे सवालो का जवाब कही  होगा................। 

टूटे रिश्तों की खनक........।

खत्म होते रिश्ते को जिन्दा कैसे करू जो रूठा है उसे कैसे मना पाउ कहुं कैसे तू कितना अजीज है सबका दुलारा प्यारा भाई है याद आते वो दिन जब पहली बार तू दूनिया मे आया हम सबने गोद में उठा तूझे प्यार से सहलाया रोते रोते बेदम तूझ नन्हे बच्चे को मां के कपडे पहन मां बन तूझे बहलाया कैसे बचपन भूल गया आज  बडा हो गया कि बहनों का प्यार तौल गया सौदा करता बहनों से अपनी अन्जानी खुशियो का वह खुशियां जो केवल फरेब के सिवा कुछ भी नही जख्मी रिश्ते पर कैसे मरहम लगाउ । आंखे थकती देख राहे तेरी पर नही पसीजता पत्थर सा दिल तेरा बैठा है दरवाजे पर कोई हाथ में लिए राखी का एक थागा, आयेगा भाई तो बाधूगी यह प्यार का बंधन वह जो बंधन से चिढता है रिश्तों को पैसो से तौलता है आया है फिर राखी का त्यौहार फिर लाया है साथ में टूटे रिश्तों की खनक.....................। जान लो यह धागा अनमोल है प्यार का कोई मोल नही इस पवित्र रिश्ते सा दूनिया में रिश्ता नही ................।                .....................

जिन्दगी छीन जीने को कहते हो तुम......।

जिन्दगी छीन, जीने को कहते हो तुम दोस्ती का नाम दे दुश्मनी निभाते हो हो तुम... क्या गम है क्यो उदास हो........ ताउम्र का गम दे हाल जानना चाहते हो  तडप पर तडप दे, खुशी का वादा करते हो मुझसे छीन कर हर खुशी मेरी कैसी वफा की रीत निभा रहे हो ........ जिसे प्यार कहते हो वह एक ढोग है इस ढोंग का कब तलक निभा सकोगे तुम। जिन्दगी छीन,जीने को कहते हो तुम आरजुओ के दरवाजे बार-बार नही खुलते अहसासों के समन्दर बार.बार नही उठते ........।      जो कहता है मै अपना हूं अपना होकर भी मुझसे अन्जाना क्यों है क्या उम्मीद पत्थर  और पागलों से जो चाहे , जहां ठोकर खाते है........।  जिन्दगी छीन ,जीने को कहते हो तुम दोस्ती के नाम पर दुश्मनी निभाते हो तुम......। 

इंसान और इंसान की फितरत ?

इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? बहुतेरे रंग भर लगता गिरगट सा स्वाग रचता ढोंग की दूनिया बसाता इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? पलभर में बना लेता गैरों को अपना भुला देता खुन के रिश्तों को लहु पानी बन बहता रगों में उजाड देता उसका ही चमन  जिसने दिया उसको जनम इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ?  अपनी बेबाकी से वो  दिलों को जख्मी कर देता है जो भर न सके वो नासुर बना देता है रौंदा इसने प्रकृति को  अपना आशियाना बना डाला कीमत जान की है बहुत सस्ती गर गरीब हो इन्सा कोई वही उसे मार डालता है  . इंसान का इंसान अब रिश्ता खत्म जो हो चला है इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ................. ....।

उस राह पर कैसे गुज़रे.................।

उम्मीदों से कहो दामन न छूटे........... जो दर खुला है खुदा का उस राह पर कैसे गुज़रे कितना सकूंन है तेरे दामन में के तू दिखता नही फिर भी मै तूझे महसूस करती हूं........... पवित्र कितनी तेरी जमीन है रूह को चैन बस तेरे पास ही मिलता है इबादत कैसे करू इस काबिल भी तो नही तूझ तक मेरी फरियाद पहुचे वजह भी तो नही........... उम्मीदों से कहो हार न माने जो सुनता है सबकी क्या वो यही कही है कैसे तूझे पा लूं अब आस को आस कब तक रहे जो दे मांगे जिन्दगी उसे मिलती नही तंग दिल बोझिल है जो वह ढोये चले जा रहे है................. जो दर खुला है खुदा का उस दर तक कैसे पंहुचे कितनी बार चाहा तू कैसे मिले पर सिर्फ उम्मीद और उम्मीद इसके सिवा कुछ नही .........................।

टूटे दिल मुश्किल से जी पाये........

मुश्किल बहुत होता है खुद को संभालना जब बिखरते है ख्वाब टुटता है मंजर मुश्किल बहुत होता है खुद को रोका पाना पूरी होती है हसरते तमाम वक्त कभी ठहरता क्यों नही? चलता रहता है बस सबसे अन्जान मुश्किल बहुत होता दिल का संभलना टूटता है जब खिलौने की तरह ख्वाहिशे जगती ही क्यो अरमानो का दम घुटना तो .....एक दिन तय ही है न फिर रो कर रूसवाईयां ...कैसे समझे वो जो समझ कर भी अन्जान रहे मुशकिल बहुत होता है सबसे रूठना जो रूठे उन्हे कैसे मनाये मुश्किल है जीवन डगर इससे पार कैसे पाये मुश्किल ही सही संभालो दोस्तो टूटे दिल बडी मुश्किल से जी पाये............।
लिफाफे में रखे खत का कोई वजुद नही होता ......... अनकही कहानी उधडते रिश्तों की जबान नही होती दर्द सिर्फ सहने के लिए होता है दर्द की कोई हद नही अब फीकी हंसी हंसते है लब खुद को कहां अधेरों में तलाश करते है खेल जो समझे जिन्दगी को उनको रोको जिन्दगी खेल नही लहुलुहान करते है शब्द शब्दों से चोट न करो जो कुछ मौत के करीब है वो कितना खुशनसीब है कोई तो गले लगाने की ख़्वाहिश रखता है जो दे सके सिर्फ खुशी यह जरूरी तो नही गुलाब भी कांटों संग रहता है नही करता कांटो से शिकायत कोई सुखे किताबों में पडे फूलों से क्या महक आती है इतने संगदिल कैसे होते लोग खुदा से डर न कोई खौफ होता है लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता....... इस जहां में किसे अपना कहे अपनों से परायों की बू आती है तडपतें जिनके लिए उनका कुछ पता नही होता सचमुच बंद लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता...........। ...........