Skip to main content

Posts

इंसान और इंसान की फितरत ?

इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? बहुतेरे रंग भर लगता गिरगट सा स्वाग रचता ढोंग की दूनिया बसाता इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ? पलभर में बना लेता गैरों को अपना भुला देता खुन के रिश्तों को लहु पानी बन बहता रगों में उजाड देता उसका ही चमन  जिसने दिया उसको जनम इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ?  अपनी बेबाकी से वो  दिलों को जख्मी कर देता है जो भर न सके वो नासुर बना देता है रौंदा इसने प्रकृति को  अपना आशियाना बना डाला कीमत जान की है बहुत सस्ती गर गरीब हो इन्सा कोई वही उसे मार डालता है  . इंसान का इंसान अब रिश्ता खत्म जो हो चला है इंसान और इंसान की फितरत  कितने अजीब है दोनो ही ................. ....।

उस राह पर कैसे गुज़रे.................।

उम्मीदों से कहो दामन न छूटे........... जो दर खुला है खुदा का उस राह पर कैसे गुज़रे कितना सकूंन है तेरे दामन में के तू दिखता नही फिर भी मै तूझे महसूस करती हूं........... पवित्र कितनी तेरी जमीन है रूह को चैन बस तेरे पास ही मिलता है इबादत कैसे करू इस काबिल भी तो नही तूझ तक मेरी फरियाद पहुचे वजह भी तो नही........... उम्मीदों से कहो हार न माने जो सुनता है सबकी क्या वो यही कही है कैसे तूझे पा लूं अब आस को आस कब तक रहे जो दे मांगे जिन्दगी उसे मिलती नही तंग दिल बोझिल है जो वह ढोये चले जा रहे है................. जो दर खुला है खुदा का उस दर तक कैसे पंहुचे कितनी बार चाहा तू कैसे मिले पर सिर्फ उम्मीद और उम्मीद इसके सिवा कुछ नही .........................।

टूटे दिल मुश्किल से जी पाये........

मुश्किल बहुत होता है खुद को संभालना जब बिखरते है ख्वाब टुटता है मंजर मुश्किल बहुत होता है खुद को रोका पाना पूरी होती है हसरते तमाम वक्त कभी ठहरता क्यों नही? चलता रहता है बस सबसे अन्जान मुश्किल बहुत होता दिल का संभलना टूटता है जब खिलौने की तरह ख्वाहिशे जगती ही क्यो अरमानो का दम घुटना तो .....एक दिन तय ही है न फिर रो कर रूसवाईयां ...कैसे समझे वो जो समझ कर भी अन्जान रहे मुशकिल बहुत होता है सबसे रूठना जो रूठे उन्हे कैसे मनाये मुश्किल है जीवन डगर इससे पार कैसे पाये मुश्किल ही सही संभालो दोस्तो टूटे दिल बडी मुश्किल से जी पाये............।
लिफाफे में रखे खत का कोई वजुद नही होता ......... अनकही कहानी उधडते रिश्तों की जबान नही होती दर्द सिर्फ सहने के लिए होता है दर्द की कोई हद नही अब फीकी हंसी हंसते है लब खुद को कहां अधेरों में तलाश करते है खेल जो समझे जिन्दगी को उनको रोको जिन्दगी खेल नही लहुलुहान करते है शब्द शब्दों से चोट न करो जो कुछ मौत के करीब है वो कितना खुशनसीब है कोई तो गले लगाने की ख़्वाहिश रखता है जो दे सके सिर्फ खुशी यह जरूरी तो नही गुलाब भी कांटों संग रहता है नही करता कांटो से शिकायत कोई सुखे किताबों में पडे फूलों से क्या महक आती है इतने संगदिल कैसे होते लोग खुदा से डर न कोई खौफ होता है लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता....... इस जहां में किसे अपना कहे अपनों से परायों की बू आती है तडपतें जिनके लिए उनका कुछ पता नही होता सचमुच बंद लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता...........। ...........

अपनी खुशी को बचा कर रखना..........

तपती धुप झुलसते मन खोजे कही अपनापन नही कुछ पास बस वीरानियां क्यों होता इस तरह क्या प्रेम का यह एक दौर है........... क्या हासिल दूनिया से लडकर खालीपन........ हां बस तन्हाई प्यार है तो बंधन क्यों बंधनो में घुट जायेगे... क्यों मांगते उम्मीदों की भीख हाथ नही भरे तुम्हारे... किससे प्यार चाहतें हो पत्थर कहती दूनियां जिसकों सिर उसपर झुकाते क्यों है लोग रूसवा करते मोहब्बतों को जान कर भी प्यार दिखाते क्यों हो छीन लेते खुशियों को दोस्तों अपनी खुशी को सबसे बचा कर रखना..................।

दिल कितना नादान है.......।

दिल कितना नादान है करता कितनी खताये है कुछ माफी के काबिल तो कुछ न माफ़ी के काबिल इस दिल ने कितना रुलाया है देख तुझको करीब होता नही एतबार है तडपे कितना रात दिन इन्तजार नजरों का था........ वो सामने रहा हम अन्जान रहे दिल कितना परेशान है इतना उछलना कि बाद में रूयेगा। ऎ दिल अब सभंल जा गिर गया तो उठ न पायेगा दिल नदान है इसकी न सुन उसकी मासुमियत एक छलावा किस राह पर यू चलता है गिरना फिर संभलना एक फितरत है दिल तो बस नदान है......................... ....।

यह राहे बडी मुश्किल..........

कभी आस मां को रोते हुए देखा है प्यार का नाम दे रिश्तों को खत्म होते देखा है वो नही जानता दर्द से बोझिल राहे खो जाती है मंजिल तक जाने में......... रह जाते है सिलसिले मायुसियों के कभी बादल को गरजते देखा है वो मिटा देता है खुद को फिर क्या रह जायेगा धरती ताकती आसमां को आसमां कहां देखता है.............. प्यार में कत्ल भी हो जाते है रोक लो बहकते कदमों को हासिल कुछ न हो पायेगा जिसे कहते वफा वो पागलपन है.................... कुछ भी न कह करे करे जो बात वही तो बात होती है यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है............................... ।