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लिफाफे में रखे खत का कोई वजुद नही होता ......... अनकही कहानी उधडते रिश्तों की जबान नही होती दर्द सिर्फ सहने के लिए होता है दर्द की कोई हद नही अब फीकी हंसी हंसते है लब खुद को कहां अधेरों में तलाश करते है खेल जो समझे जिन्दगी को उनको रोको जिन्दगी खेल नही लहुलुहान करते है शब्द शब्दों से चोट न करो जो कुछ मौत के करीब है वो कितना खुशनसीब है कोई तो गले लगाने की ख़्वाहिश रखता है जो दे सके सिर्फ खुशी यह जरूरी तो नही गुलाब भी कांटों संग रहता है नही करता कांटो से शिकायत कोई सुखे किताबों में पडे फूलों से क्या महक आती है इतने संगदिल कैसे होते लोग खुदा से डर न कोई खौफ होता है लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता....... इस जहां में किसे अपना कहे अपनों से परायों की बू आती है तडपतें जिनके लिए उनका कुछ पता नही होता सचमुच बंद लिफाफों में रखे खतो का कोई वजुद नही होता...........। ...........

अपनी खुशी को बचा कर रखना..........

तपती धुप झुलसते मन खोजे कही अपनापन नही कुछ पास बस वीरानियां क्यों होता इस तरह क्या प्रेम का यह एक दौर है........... क्या हासिल दूनिया से लडकर खालीपन........ हां बस तन्हाई प्यार है तो बंधन क्यों बंधनो में घुट जायेगे... क्यों मांगते उम्मीदों की भीख हाथ नही भरे तुम्हारे... किससे प्यार चाहतें हो पत्थर कहती दूनियां जिसकों सिर उसपर झुकाते क्यों है लोग रूसवा करते मोहब्बतों को जान कर भी प्यार दिखाते क्यों हो छीन लेते खुशियों को दोस्तों अपनी खुशी को सबसे बचा कर रखना..................।

दिल कितना नादान है.......।

दिल कितना नादान है करता कितनी खताये है कुछ माफी के काबिल तो कुछ न माफ़ी के काबिल इस दिल ने कितना रुलाया है देख तुझको करीब होता नही एतबार है तडपे कितना रात दिन इन्तजार नजरों का था........ वो सामने रहा हम अन्जान रहे दिल कितना परेशान है इतना उछलना कि बाद में रूयेगा। ऎ दिल अब सभंल जा गिर गया तो उठ न पायेगा दिल नदान है इसकी न सुन उसकी मासुमियत एक छलावा किस राह पर यू चलता है गिरना फिर संभलना एक फितरत है दिल तो बस नदान है......................... ....।

यह राहे बडी मुश्किल..........

कभी आस मां को रोते हुए देखा है प्यार का नाम दे रिश्तों को खत्म होते देखा है वो नही जानता दर्द से बोझिल राहे खो जाती है मंजिल तक जाने में......... रह जाते है सिलसिले मायुसियों के कभी बादल को गरजते देखा है वो मिटा देता है खुद को फिर क्या रह जायेगा धरती ताकती आसमां को आसमां कहां देखता है.............. प्यार में कत्ल भी हो जाते है रोक लो बहकते कदमों को हासिल कुछ न हो पायेगा जिसे कहते वफा वो पागलपन है.................... कुछ भी न कह करे करे जो बात वही तो बात होती है यह राहे बड़ी मुश्किल पर चलने की जरूरत होती है............................... ।
जख्म अब हंसते है न जाने मुझसे क्या चाहते है। हंसी है लबों पर फीकी सी   मायूसियो के दौर रहते है जिन्दगी को खेल समझा खिसकते पल हाहाकार  करते है, थोडा ठहर जा वक्त अभी सांस तो ले लूं न बुलाओ मुझे  चन्द लम्हे तो जी लूं क्या है फलसफा जब चाहो तो नही मिलता  न चाहो तो सब कुछ पास तुम्हारे नियति तेरे खेल न्यारे  तुने खुब ठगा है अब जख्म मुझ पर ही चिल्लाते .............है

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया........।

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया नफरत और गम इसके सिवा कुछ न दिया ? वक्त तूं कब तक मेरा इम्तहान लेगा तेरे सबब का कही तो अन्त होगा रूसवा करे मुझे जमाना के वफा करने वाले के हिस्से , सिर्फ यही एक सौगात आती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया उलझन और परेशानी ? इसके सिवा कुछ न दिया मोड दो वक्त की धारा को कह देना होता है आसान सितम पर सितम तमन्नाओ की ख्वाहिशों की कीमत क्या होती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया ताउम्र का दर्द इसके सिवा कुछ न दिया...................।
चटकते है शीशे तो आवाज़ आती है  दिल टुटे तो खनक भी नही दस्तूर कैसा है यह इश्क का जिसे जिन्दगी कहो वही मौत का समान है, अपना लिया हर अन्दाज जिन्दगी का जीने के लिए यह क्यो कर जरूरी था वो कहता है साया हूं, है तो जुदा क्यों है? साये से कहो , दूर रहे नजदीकी का विलाप नही जुस्तजू है बस यह काई रूठे तो मना लेना  कही ताउम्र फिर रोना न पडे पायलो की खनखन मिलती नसीबों से, किसी घुंघरू को टूटने न देना ।