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जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया........।

जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया नफरत और गम इसके सिवा कुछ न दिया ? वक्त तूं कब तक मेरा इम्तहान लेगा तेरे सबब का कही तो अन्त होगा रूसवा करे मुझे जमाना के वफा करने वाले के हिस्से , सिर्फ यही एक सौगात आती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया उलझन और परेशानी ? इसके सिवा कुछ न दिया मोड दो वक्त की धारा को कह देना होता है आसान सितम पर सितम तमन्नाओ की ख्वाहिशों की कीमत क्या होती है जिन्दगी ने जिन्दगी को क्या दिया ताउम्र का दर्द इसके सिवा कुछ न दिया...................।
चटकते है शीशे तो आवाज़ आती है  दिल टुटे तो खनक भी नही दस्तूर कैसा है यह इश्क का जिसे जिन्दगी कहो वही मौत का समान है, अपना लिया हर अन्दाज जिन्दगी का जीने के लिए यह क्यो कर जरूरी था वो कहता है साया हूं, है तो जुदा क्यों है? साये से कहो , दूर रहे नजदीकी का विलाप नही जुस्तजू है बस यह काई रूठे तो मना लेना  कही ताउम्र फिर रोना न पडे पायलो की खनखन मिलती नसीबों से, किसी घुंघरू को टूटने न देना ।

तुम हो हम है फिर साथ चलता है फासला..........।

तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला सवाल बस सवाल बीच में एक भंवर सा डूबते उतरते तूफानों से घिर जाते है फडकती आंखे ,डर अन्जाना सा क्यों कश्ती को साहिल की दरकार नही शुष्क होठ, शबनम का कतरा नही मन करता उड चलुं आसमानों तक कैसे आसमां तो बहुत दूर है दिल तक जो पहूचं वो आवाज कहां है। किसको तलाशता है तूं प्यार एक फसाना है खामोशी से राह नही मिलती  चीखने से पुकार नही बनती सवाल बस सवाल बीच में एक भंवर सा तुम हो हम है फिर भी साथ चलता है फ़ासला.....................। 

दिल क्या चाहता है............।

दिल क्या चाहता है,यह चाहत से अन्जान है.............। आती हई बर्फीली हवाओ से पूछो तूफान का कोई पैगाम है क्या एक मोड जो छोड आये हम उस मोड से गुजरने का क्या इरादा है हसीन वादियों तारों के  टूटने का इन्तजार न करो  मांगू एक मुराद ऎसी  कोई ख्वाहिश तो नही दिल क्या चाहता है,यह चाहत से अन्जान है..........। सरगोशियां सी कानो में उसको आवाज न दों अरमान मचल गये तो  बहुत कोहराम मचायेगें बहारों को गुजर जाने दो ख्वाबों के जहां में जाने दो। दिल क्या चाहता है, यह चाहत से अन्जान है..............।

किसका चेहरा देखू तेरे चेहरे के बाद............।

किसका चेहरा देखूं तेरे चेहरा देख कर सजदा तूझे है मेरी हर ख्वाहिश के लिए नूर है तू ,इस जहां में कोई तेरे मुकम्मल नही.............। तेरे दम से कयामत है तेरे दम से दूनिया है मेरा तेरा कुछ नही रह जाना बस नाम तेरा किसका ओज है तेरे ओज सा..............................। किसका चेहरा देखू तेरा चेहरा देख कर वो कौन खुशनसीब है जो तेरा दीदार करता है हम तो बस ख्वाबों की दरकार करते है..................। तेरे दम से कलम स्याह होती है वरना मेरी कलम तो खाख है मेरे खुदा तू कब मुझे अपना अक्स दिखायेगा.......................? किसका चेहरा देखु तेरा चेहरा देख कर इन्तजार तेरा सिर्फ तेरा है तू मेरी जुस्तजू है सिर्फ आखिरी ख़्वाहिश है..............................।                        ..........................

नित नवीन सृजन करे.....!

नव वर्ष नव कल्पना  नित नवीन सृजन करे । खिले फुल महके गुलशन  सरस किरणों का स्वागत करे ......................! गुजित भंवरे,गुनगुन स्वर  रिमझिम फूहार की कामना करे  जीवन हो सरल दिशायें दीप्तमान नवीन प्रहर का इन्तजार करें........!   नव वर्ष नव कल्पना  नित नवीन सृजन करे दुख भ्रम की किचिंत छाया न हो सुखों की अल्पविराम रागिनी हो एक नवगीत को साज आवाज दे.... ....................! नव वर्ष नव कल्पना  नित नवीन सृजन करे। 

खुदाया मुझे रहमतो का एक समुन्दर दे दे.................

खुदाया मुझे रहमतो का एक समन्दर दे ............ डूब जाउ मै तेरी इबादत में इतना के कोई मुझे हटा न सके। खुदाया मुझे उजली धुप का आंगन दे दे। रख सकूं हर एक महरूम हो चुके, खुशी से बन्दे को  एक जमी ऎसी जहां नफरत पांव न जमाती हूं सिर्फ तेरी नूर से सरोबार दीवारे हों खिलते हो फूल चट्टानों पर भी मुस्कुराता एक गुलशन दे दे। वो जो देखा था अक्स तेरा हर दीदार में वो नजर दे दे। तेरी इबादत में लूटा दूं अपना सबकुछ तू सिर्फ एक झलक दे दे। खुदाया मुझे रहमतों का एक समुन्दर दे दे...............।