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कुछ कहता दिया बाती संग

कुछ कहता है दिया बाती से कुछ कहती बाती दिये से ! दोनो ही जलते तपते है साथ जलते साथ बुझते  अनबुझ एक पहेली से   दिया रोशन बाती संग बाती रोशन दिये संग ! अलग हो जैसे अंधेरे से  निश्वान जैसे  प्राण बिन एक साथ जलना नियती इनकी  न करो अलग दिये संग बाती को  दिया झिलमिल बाती संग झिलमिल दीपकतार! साथ दोनो यूं दमकते  लगते  टिम टिम जुगनू से  मुस्कुराता मानो देख बाती को  दिया है मानो बाती रंग न करो अलग दिये संग बाती को !       ____________

एक ख्याल हुं मै ।

कोई मुझसे कहे कौन हुं मै, एक ख्याल हुं बस ख्यालो का काई नाम नही़, नही कोई रंग रूप के बस ख्याल हूं मै कभी आना कभी जाना, है फितरत इसकी ख्याल का कोई नाम नही, नही रंग रूप  के बस एक ख्याल हुं मै कोई मुझसे कहे तेरी चाहत क्या है बस दफन होना  न पूछे कोई मेरा हाल क्या है के बस ख्याल हूं मै झूठ फरेब की इस दूनिया मै कोई हिमाकत करू ऎसी नही औकात मेरी कोई मुझसे पुछे कहां है घर मेरा  वो बसेरा ठुकरा दिया हमने के बस ख्याल हूं मै। ख्यालों का कोई पडाव नही टुटना बिखरना जन्म उनका फिर क्यू शिकायत  ख्याल का कोई नाम नही , नही रंग रूप के बस एक ख्याल हूं मै जाने अन्जाने ही आ जाऊ दिल में तो अफसोस न करना  इतनी जल्दी मिट न पायेगी हस्ती मेरी रह रह कर कचोटना है आदत मेरी के बस एक  ख्याल हुं मै बन्द कर लो अपनी आंखे हाजिर मुझे पाओगे तुम कहो और मै चला जाऊ तुम्हारे जहन के सिवा कहां है बसेरा मेरा, कह दो चला जाउगा गल्ती से फिर आ जाऊ तो मुझे कुछ न कहना के बस एक ख्याल हुं मै।                                  ...

बेझिझक सी तरन्नुम में यह दौर कैसा है....

बेझिझक सी तरन्नुम में ये दौर कैसा है क्या सोचे हम क्या कहे अब सब कुछ फीका है। मायुस होता है मन है बेचैन भी देख खाली हाथों को कितने व्याकुल है हम बेबसी को क्या दूसरा नाम दूं जो नही अपना उसे कैसे अपना कहु क्या सोचे क्या कहे हम अब सब कुछ फीका है । आरजू क्या चाहती है देख ये पागलपन न कहो उसको कुछ भी वो एक भंवरा है उसकी आंखो की चमक को क्या नाम दे हम लुटाने बैठा है जो अपनी हस्ती आज रोक लो उसको बर्बादियों के कहर से क्या सोचे क्या कहे हम अब सबकुछ फीका है।

पलकें क्यों झुक जाती है?

पलकें क्यों झुक जाती है क्यों बुदें झलक जाती है? कहते ही शब्द बोझिल होता है, मन फिर खामोश होता है कही कोई अंर्तमन मीलों तलक लम्बी दूरी.............. देखो आेसं सी छलक आयी है मेरा दामन उडने लगा बस युं ही कह दुं क्या तोड के सारे बन्धन? इन्द्रधनुष सा है मन संतरगी ख्वाब दुर तक............ चुप क्यू हो ,दिन फिर न होगा ये उडते बादल खो जायेगे रहेगा विश्राम यू ही? तेरे मेरे बीच के भेद शोर मचायेगे दूर तलक............      __________
          महकती रहों तुम ,नन्ही कली मेरे बगिया की.....                  युं जैसे महकती है रात की रानी           तुम मेरे जीवन की आधार हो           तुम बिन थी कितनी अधूरी!                    महकती रहों तुम ,नन्ही कली मेरे बगिया की.....                                                                                  महकती रहों तुम नन्ही कली मेरी बगिया की........ जैसा मैने सोचा तुम हो नितांत वैसी ही तुम्हारा हंसना, जैसे जान हो मेरी तुम्हारा रोना, लगता ले लेगा प्राण मेरे! महकती रहो तुम,नन्ही कली मेरी बगिया की....... जीवन था जो रसहीन तुमने अपने कदमों की आहट से मेरे हर क्षण को कर...