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न दिन का पता न रात की फिक्र

न दिन का पता न रात की फिक्र
यह कौन से मुकाम पर आ पहुंची है जिन्दगी
अपनी कहे या उसकी सुने
कैसा मजाक कर रही है जिन्दगी
वक्त है जो ठहरता नही
बस रोने का सवाल बनती है जिन्दगी
न यकीन जमाने पर करो दोस्तों
यकीनो का कुछ नही होता
कौन अपना कौन पराया ?
किसे अपनाये किसे ठुकराये
सवाल पर सवाल बनी है जिन्दगी
न दामन भरा है न खाली ही हाथ
कितने अचरज से भरी है जिन्दगी
अपनी कहे या उसकी सुने
कैसा मजाक कर रही है जिन्दगी.................।
कर दिया खुद को वक्त के हवाले
अब क्या रंग दिखायेगी जिन्दगी
चांद-तारों के बाते किताबी है
किताबो से नही चलती जिन्दगी...........................।

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गूंजते है सन्नाटो में ......!!

अब वो बात कहा, जो कभी थी 
गूंजते है सन्नाटो में 
कह्कशे जोरो से 
थी मुकमल कोशिस बस ....!!
गमगीन सी है महफ़िल तेरी 
वक्त कभी ठहरता नहीं 
इंतजार कितना भी करो 
जो आज है वो कल न होगा 
जो कल होगा उसका बारे 
क्या जान सका कोई कभी .....!!!
परदे लाख डाल लो 
सच  पंख पसारता ही है 
फिर टूटते है मासूम दिल 
लगती है तोहमते वफ़ा पर 
अब यहाँ क्या पायेगा 
लाशो और खंडरो में 
अतीत को क्या तलाश पायेगा 
रहा एक सदमा सही, पर 
हुआ यह भी अच्छा ही  
चल गया पता अपनों में गैरो का 
सभी अपने होते तो गैर  कहा जाते 
अब तन्हाई में ख़ुशी का दीप जलता नहीं 
बस है सिसकियाँ...और वीरानिया 
देखना है वफाएचिराग जलेगा कब तलक  
जो था गम अब उसकी भी परवाह नहीं..... l

हे कृष्ण, हे गोपाल !

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

हे कृष्ण , हे गोपाल , हे माधव
किस नाम से पुकारू तुम्हे !
कान्हा , बांसुरी बैजया
देवकी नन्दन , हे कैन्हया
किस रूप में निहारू तुम्हे |

हे पालनहार , हे जगत के रखवाले
किस तरह पूँजू तुम्हे |
तुम्हे माता हो तुम्ही पिता हो
किस तरह रिश्तें में बाँधु तुम्हे |

हे मदनमुरारी , हे यशोदा के लाल
क्या कह प्रीत निभाऊ तुमसे
तुमसे जीवन की आस
तुम्हे खो कर जी न पांऊ मै |

हे कृष्ण , हे गोपाल ....

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सुनीता शर्मा खत्री
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भड़ास blog: आखिर कब तक सहूंगी......

आखिर कब तक सहूंगी.......  http://bhadas.blogspot.com   पर   की इस कड़ी को पढे........