Skip to main content

तुम ही तो हो !!

************

कहाँ जाऊ तेरी यादों से बचकर
हर एक जगह बस तू ही है
तेरा प्यार तेरा एकरार, तेरी तकरार
हरदम मुझमें समाया है
मेरी रूह में बस तेरा ही साया है,
हमसफर बन साथ निभाना था
बीच राह में ही छोड दिया तन्हा मुझकों
दिन ढलते ही तेरी
यादें मुझे घेर लेती है
तू ही है हर जगह .............
हवायें भी यही कहती है
क्यो लिया लबों से मेरा नाम
जब मुझसे दूर ही जाना था |
फिर हमसे न जीया जायेगा
तेरे बिन जिन्दगी का जहर
 न पीया जायेगा, मासूम है
 यह दिल बहुत...
हर लम्हा तूझे ही
याद करता जायेगा |

##

Comments

Popular posts from this blog

हे कृष्ण, हे गोपाल !

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

हे कृष्ण , हे गोपाल , हे माधव
किस नाम से पुकारू तुम्हे !
कान्हा , बांसुरी बैजया
देवकी नन्दन , हे कैन्हया
किस रूप में निहारू तुम्हे |

हे पालनहार , हे जगत के रखवाले
किस तरह पूँजू तुम्हे |
तुम्हे माता हो तुम्ही पिता हो
किस तरह रिश्तें में बाँधु तुम्हे |

हे मदनमुरारी , हे यशोदा के लाल
क्या कह प्रीत निभाऊ तुमसे
तुमसे जीवन की आस
तुम्हे खो कर जी न पांऊ मै |

हे कृष्ण , हे गोपाल ....

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

##
सुनीता शर्मा खत्री
©



बेझिझक सी तरन्नुम में यह दौर कैसा है....

बेझिझक सी तरन्नुम में ये दौर कैसा है
क्या सोचे हम क्या कहे अब सब कुछ फीका है।
मायुस होता है मन है बेचैन भी
देख खाली हाथों को कितने व्याकुल है हम
बेबसी को क्या दूसरा नाम दूं
जो नही अपना उसे कैसे अपना कहु
क्या सोचे क्या कहे हम अब सब कुछ फीका है ।
आरजू क्या चाहती है देख ये पागलपन
न कहो उसको कुछ भी वो एक भंवरा है
उसकी आंखो की चमक को क्या नाम दे हम

लुटाने बैठा है जो अपनी हस्ती आज
रोक लो उसको बर्बादियों के कहर से
क्या सोचे क्या कहे हम अब सबकुछ फीका है।